आआपा के चार विधायकों का निलंबन उनके असंसदीय आचरण का परिणामः विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने आम आदमी पार्टी (आआपा) के चार सदस्यों के निलंबन को लेकर इस बात पर जोर दिया कि सदन और आसन की गरिमा को राजनीतिक हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विगत जनवरी में शीतकालीन सत्र के दौरान सदस्यों को निलंबित करने का निर्णय मनमाना नहीं था, बल्कि उनके निरंतर आंदोलन, दुर्व्यवहार और उपराज्यपाल के अभिभाषण जैसे गरिमामय अवसर पर उनके द्वारा डाले गए व्यवधान का एक आवश्यक परिणाम था।
विजेंद्र गुप्ता ने नेता प्रतिपक्ष आतिशी को एक औपचारिक पत्र जारी कर ‘उदंड सदस्यों’ के बचाव और विपक्ष द्वारा प्रदर्शित ‘असंसदीय आचरण‘ पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की। विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष को याद दिलाया कि चार सदस्यों का निलंबन पूरी तरह से दिल्ली विधानसभा की प्रक्रिया के नियमों के अनुरूप था। उन्होंने उल्लेख किया कि इन सदस्यों को शुरू में उपराज्यपाल द्वारा विधानसभा को संबोधित करने के संवैधानिक कर्तव्य में बाधा डालने के लिए निलंबित किया गया था। अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि ऐसे व्यवहार की निंदा करने के बजाय विपक्ष ने राजनीतिक लाभ लेने के लिए निलंबन के कारणों के बारे में ‘भ्रामक जानकारी’ फैलाने का रास्ता चुना।
उन्होंने कहा कि 21 मार्च को हुई बैठक के दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष को विशेष रूप से सलाह दी थी कि वे सदन की बैठक में उपस्थित रहें और निलंबन वापसी के मामले पर सदन को निर्णय लेने दें। इसके बावजूद नेता प्रतिपक्ष ने कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया। पत्र के अनुसार नेता प्रतिपक्ष को अपनी पार्टी के सदस्यों की विफलताओं और आपत्तिजनक व्यवहार को छिपाने के लिए अध्यक्ष और सदन को घसीटना शोभा नहीं देता।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली विधानसभा के जनवरी में हुए शीतकालीन सत्र के दौरान उपराज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालने और सदन में असंसदीय आचरण के आरोप में आआपा के चार विधायकों- संजीव झा, कुलदीप कुमार, सोमदत्त और जरनैल सिंह को निलंबित किया गया था। यह निलंबन अब भी जारी है, जिसके विरोध में आआपा ने मौजूदा बजट सत्र के बहिष्कार की चेतावनी दी थी। मौजूदा बजट सत्र में आआपा के कोई सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे।विजेंद्र गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सत्तावादी या पक्षपाती होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनकी अध्यक्षता में वर्तमान सदन पिछले वर्षों की तुलना में विपक्षी सदस्यों के प्रति अधिक सहनशील और उदार रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सहनशीलता सदन की सुचारू कार्यवाही की कीमत पर नहीं हो सकती। उन्होंने निलंबित सदस्यों से अपने कृत्यों पर पश्चाताप करने और सदन से माफी मांगने का आह्वान किया। उन्होंने विपक्ष से विधायी कर्तव्यों से भागकर अपने मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने के बजाय रचनात्मक रूप से चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

