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(लीड) मंत्री सूद ने लेगेसी कचरे को वैज्ञानिक तरीके से तेजी से खत्म करने के दिए निर्देश

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(लीड) मंत्री सूद ने लेगेसी कचरे को वैज्ञानिक तरीके से तेजी से खत्म करने के दिए निर्देश


नई दिल्ली, 26 जून (हि.स.)। दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को गाजीपुर लैंडफिल साइट का निरीक्षण किया तथा नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और कार्य निष्पादन एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चल रहे लेगेसी कचरा निस्तारण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को गाजीपुर लैंडफिल साइट का दौरा करके कचरा प्रबंधन के काम की प्रगति निरीक्षण किया। उन्होंने चल रहे कार्यों की गति का आकलन किया और कचरा प्रबंधन हासिल करने के लिए उन्हें समय पर और प्रभावी ढंग से पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस दौरान दिल्ली नगर निगम (एमडीसी) के अतिरिक्त आयुक्त लीला धर मेघवाल व निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

मंत्री आशीष सूद ने गाजीपुर लैंडफिल साइट पर ही परियोजना की स्थिति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार मिशन मोड में वैज्ञानिक तरीके से दिल्ली के लेगेसी लैंडफिल स्थलों को समाप्त करने के लिए कार्य कर रही है।

मंत्री ने बताया कि फेज-I के अंतर्गत 24 नवंबर 2022 से 19 नवंबर 2024 तक 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य सौंपा गया था, लेकिन पूरे अनुबंध काल में केवल 13.90 लाख मीट्रिक टन कचरे का ही बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया जा सका। उन्होंने बताया कि फरवरी 2025 में वर्तमान सरकार के गठन के बाद इस कार्य में उल्लेखनीय तेजी लाई गई। 7 मार्च 2025 को फेज-II के तहत 30 लाख मीट्रिक टन लेगेसी कचरे की बायोमाइनिंग का कार्य आवंटित किया गया, जिसे सितंबर 2026 तक पूरा किये जाने का लक्ष्य है।

मंत्री सूद ने बताया कि फेज-II के अंतर्गत अब तक लगभग 24 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है तथा लगभग 20 एकड़ भूमि कूड़ा मुक्त हो गई है। अप्रैल 2026 में किए गए नवीनतम ड्रोन सर्वेक्षण के अनुसार गाजीपुर लैंडफिल में 67.81 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था। 30 अप्रैल से 25 जून 2026 के बीच लगभग 3.39 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग के माध्यम से निस्तारण किया गया, जिसके बाद वर्तमान में साइट पर लेगेसी एवं ताजे कचरे सहित कुल 66.68 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष है। लक्ष्य है कि दिसंबर 2027 तक शेष कचरे का पूर्ण निस्तारण कर दिया जाए।

निरीक्षण के दौरान मंत्री सूद ने कूड़े के पहाड़ को खत्म करने में आने वाली दो प्रमुख बाधाओं के बारे में बताया कि पहली बाधा प्रतिदिन आने वाले नगर निगम कचरे से संबंधित है। अधिकारियों ने बताया कि शाहदरा नॉर्थ एवं शाहदरा साउथ जोन से प्रतिदिन लगभग 2,400 से 2,500 मीट्रिक टन ताजा कचरा गाज़ीपुर साइट पर आता है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा वेस्ट-टू-एनर्जी संयंत्र में भेज दिया जाता है, जबकि लगभग 800 मीट्रिक टन प्रतिदिन ताज़े कचरे के ढेर में जमा हो रहा है।

मंत्री सूद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ताजे कचरे का प्रसंस्करण लेगेसी कचरे से पूरी तरह अलग व्यवस्था के तहत किया जाए, ताकि नए कचरे का जमाव न हो और बायोमाइनिंग का कार्य निर्बाध रूप से जारी रह सके। उन्होंने अगले दो माह के लिए फ्रेश वेस्ट प्रोसेसिंग एक्शन प्लान तैयार कर मंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।

दूसरी प्रमुख चुनौती बायोमाइनिंग के दौरान निकलने वाले इनर्ट (अप्रसंस्करणीय) पदार्थ के निस्तारण से संबंधित है। अधिकारियों ने बताया कि अब इसके निस्तारण के लिए गाजीपुर लैंडफिल से लगभग 23 किलोमीटर दूर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में व्यवस्था कर दी गई है।

मंत्री सूद ने कार्य निष्पादन एजेंसी को निर्देश दिए कि इनर्ट पदार्थ को संबंधित जगह तक पहुंचाने के लिए वाहनों की संख्या तत्काल बढ़ाई जाए और एक सप्ताह के भीतर मंत्री कार्यालय को इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि इनर्ट के निस्तारण के कारण बायोमाइनिंग कार्य प्रभावित न हो। वर्तमान में गाजीपुर में प्रतिदिन लगभग 7,000 मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग की जा रही है। कार्यों में और तेजी लाने की आवश्यकता पर गंभीरता से ध्यान देते हुए मंत्री ने अधिकारियों एवं एजेंसी को निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक प्रतिदिन की क्षमता बढ़ाकर 12,000 मीट्रिक टन की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव