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दिल्ली पुलिस पर एकतरफा आरोपों से टूट रहा जवानों का मनोबल: पूर्व डीजीपी बृजलाल

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। हाल ही में दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई को लेकर जारी बहस के बीच उप्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने दिल्ली पुलिस का पक्ष रखा। शुक्रवार को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सरकार या सुप्रीम कोर्ट की ओर से नहीं, बल्कि पूर्व पुलिस अधिकारियों द्वारा दिल्ली पुलिस के समर्थन और एकजुटता व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके विचार पूरी तरह व्यक्तिगत हैं और इनका सरकार या न्यायालय की कार्यवाही से कोई संबंध नहीं है।

बृजलाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संतुलित रुख अपनाया है और सरकार ने भी प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया। इसके बावजूद सोशल मीडिया, अदालतों और संसद में दिल्ली पुलिस के खिलाफ लगातार एकतरफा आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त के खिलाफ शिकायतें और याचिकाएं दायर होने से खासकर निचले स्तर पर काम करने वाले पुलिसकर्मियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। ऐसे आरोप उनके कर्तव्य निर्वहन पर भी असर डालते हैं।

उन्होंने कहा कि कई जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग पुलिस व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण की प्रक्रिया को पूरी तरह समझे बिना बयान दे रहे हैं। इससे आम लोगों में भ्रम पैदा हो रहा है। उन्होंने इस धारणा को भी गलत बताया कि पुलिस की हर कार्रवाई सीधे गृह मंत्री के निर्देश पर होती है। पेललेट गन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नॉन-लीथल हथियारों के बारे में तथ्य कम और भ्रांतियां ज्यादा फैलाई जा रही हैं।

पूर्व डीजीपी ने कहा कि पुलिस बल प्रयोग की एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करता है। पहले चेतावनी दी जाती है, फिर जरूरत पड़ने पर वाटर कैनन, आंसू गैस, लाठीचार्ज और अंत में अन्य वैधानिक नॉन-लीथल साधनों का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के आरोपों को भी निराधार बताया।

करीब 38 वर्षों के अपने पुलिस सेवा अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने पंजाब में आतंकवाद, चंबल में डकैतों और मेरठ समेत कई संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था संभालने के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि एक पुलिस अधिकारी केवल आदेश नहीं देता, बल्कि जरूरत पड़ने पर स्वयं मोर्चे पर उतरकर नेतृत्व भी करता है। उन्होंने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सशस्त्र बलों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा उनके बलिदान और समर्पण से मजबूत हुई है।

बृजलाल ने ग्रेट निकोबार परियोजना को देश की सामरिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। साथ ही समाज, मीडिया और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि पुलिस का मनोबल कमजोर करने के बजाय उसके त्याग और योगदान का सम्मान करें। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी भी परिवार वाले इंसान हैं और उनका मनोबल मजबूत रहना देश और समाज, दोनों के हित में है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी