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राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवसः छात्रशक्ति से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ 77 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुका है अभाविप

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राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवसः छात्रशक्ति से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ 77 वर्षों की यात्रा पूरी कर चुका है अभाविप


नई दिल्ली, 09 जुलाई (हि.स.)। देशभर में नौ जुलाई को राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की स्थापना हुई थी। इस अवसर पर छात्र संगठन के देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इसी क्रम में राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 78वें स्थापना दिवस के अवसर पर अभाविप केंद्रीय कार्यालय, मुंबई में ध्वजारोहण किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय सचिवालय सचिव गौरव सिंह राजावत एवं पश्चिम क्षेत्रीय संगठन मंत्री गीतेश चव्हाण प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर जारी संदेश में छात्र संगठन का कहना है कि अभाविप का उद्देश्य केवल छात्र राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है। संगठन का मानना है कि छात्रशक्ति राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा है और उसे सकारात्मक दिशा देकर देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

संगठन से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि अभाविप ने उन्हें सेवा, समर्पण और राष्ट्र प्रथम का भाव सिखाया। उनके अनुसार परिषद ने छात्र समस्याओं के समाधान के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और चरित्र निर्माण के लिए निरंतर कार्य किया है।

अभाविप ने अपने कार्यकाल में शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों, जैसे फीस वृद्धि, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, शिक्षा के व्यवसायीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर समय-समय पर आंदोलन किए हैं। संगठन ने वर्ष 1975 के आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन में भागीदारी निभाई। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत, सीमावर्ती क्षेत्रों और जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय एकात्मता से जुड़े अभियानों में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1990 में 'कश्मीर बचाओ आंदोलन' तथा असम में अवैध घुसपैठ के विरोध में भी परिषद ने व्यापक अभियान चलाए।

सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में भी अभाविप ने वृक्षारोपण, रक्तदान, आपदा राहत, पर्यावरण संरक्षण और 'स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट' जैसे अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों को समाज सेवा से जोड़ने का प्रयास किया है। संगठन का मानना है कि आधुनिक विज्ञान और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा का समन्वय देश के समग्र विकास का आधार बन सकता है।

अभाविप का कहना है कि राष्ट्रवाद उसके लिए भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। संगठन लोकतांत्रिक संवाद, अध्ययन और वैचारिक विमर्श के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने पर बल देता है।

संगठन के अनुसार अपनी 77 वर्षों की यात्रा में अभाविप ने शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, पत्रकारिता, उद्योग, राजनीति और सामाजिक जीवन सहित अनेक क्षेत्रों में नेतृत्व प्रदान करने वाले कार्यकर्ता तैयार किए हैं। परिषद का कहना है कि उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि ऐसे युवाओं का निर्माण है, जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए समाज और देश की सेवा के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी