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आम आदमी पार्टी ने एमसीडी टोल टेंडर में 680 करोड़ के घोटाले का लगाया आरोप, सीबीआई जांच और टेंडर रद्द करने की मांग की

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आम आदमी पार्टी ने एमसीडी टोल टेंडर में 680 करोड़ के घोटाले का लगाया आरोप, सीबीआई जांच और टेंडर रद्द करने की मांग की


नई दिल्ली, 05 अगस्त (हि.स.)। आम आदमी पार्टी (आआपा) ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) पर टोल टैक्स टेंडर में 680 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि 5,500 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी आधार पर बाहर कर 4,820 करोड़ रुपये की बोली लगाने वाली कंपनी को ठेका दे दिया गया, जिससे निगम को 680 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। आआपा ने इस पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने और टेंडर रद्द कर दोबारा ओपन टेंडर जारी करने की मांग की है।

आआपा मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि एमसीडी स्थायी समिति को दरकिनार कर 5,500 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया और बाद में कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को ठेका दे दिया। उनका दावा है कि सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी को तकनीकी कारणों का हवाला देकर बाहर कर दिया गया, जबकि कम बोली लगाने वाली कंपनी को अनुबंध सौंप दिया गया।

कुलदीप कुमार ने आरोप लगाया कि टेंडर में 122 लेन के सिंगल कॉन्ट्रैक्ट और 24 महीने की शर्त जानबूझकर जोड़ी गई, ताकि एक विशेष कंपनी को फायदा मिल सके। उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होने और कथित रूप से ब्लैकलिस्ट किए जाने के बावजूद उसे टेंडर दिया गया।

आआपा के सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने दावा किया कि पार्टी की सरकार के दौरान प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए इन शर्तों को हटाया गया था, लेकिन निगम ने इन्हें दोबारा शामिल कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में नेगोशिएशन क्लॉज का भी उपयोग नहीं किया गया और जल्दबाजी में एलओआई जारी कर ठेका सौंप दिया गया।

पार्टी की सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने आरोप लगाया कि निगम की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद अधिक राजस्व देने वाली बोली को नजरअंदाज किया गया। वहीं, निगम पार्षद राजीव चौधरी ने कहा कि निगम में फंड की कमी के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और इस तरह के मामलों से जनता का नुकसान हो रहा है।

आआपा ने मांग की है कि कथित अनियमितताओं की सीबीआई से जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और पूरे टेंडर को रद्द कर नई पारदर्शी निविदा प्रक्रिया शुरू की जाए।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी