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काव्य संग्रह 'मणिकर्णिका' का लोकार्पण, साहित्य समाज की चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम : डॉ. जयति ओझा

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काव्य संग्रह 'मणिकर्णिका' का लोकार्पण, साहित्य समाज की चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम : डॉ. जयति ओझा


नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.)। देवारण्य फाउंडेशन की प्रस्तुति एवं सर्व भाषा ट्रस्ट, दिल्ली के सहयोग से वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जयति ओझा के काव्य संग्रह 'मणिकर्णिका' का लोकार्पण मंगलवार को कांस्टीट्यूशन क्लब, के डिप्टी स्पीकर हॉल में हुआ।

कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि एवं गीतकार अजहर इकबाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने डॉ. जयति ओझा की 'मणिकर्णिका' की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य समाज की संवेदनाओं को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है और ऐसी रचनाएं पाठकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं।

अपने संबोधन में डॉ. जयति ओझा ने कहा कि 'मणिकर्णिका' केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन, आस्था, संघर्ष और मानवीय संवेदनाओं की एक आत्मिक यात्रा है। उन्होंने कहा कि साहित्य मनुष्य को स्वयं से जोड़ने के साथ-साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करता है।

उन्होंने कहा, मेरी कामना है कि यह कृति पाठकों को जीवन के गहरे प्रश्नों पर विचार करने और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा दे। शब्द तभी सार्थक होते हैं, जब वे संवेदना को जागृत करें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनें।

डॉ. ओझा ने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। साहित्य समाज को जोड़ने, संवाद को मजबूत करने और मानवीय मूल्यों को संरक्षित रखने का कार्य करता है। उन्होंने युवा पीढ़ी से साहित्य पढ़ने और सृजन की परंपरा से जुड़ने की अपील की।

कार्यक्रम में काव्य पाठ, साहित्यिक संवाद और विचार-विमर्श के माध्यम से रचनात्मक अभिव्यक्तियों को साझा किया गया। वक्ताओं ने डॉ. जयति ओझा की कृति 'मणिकर्णिका' को समकालीन संवेदनाओं और भारतीय सांस्कृतिक चेतना का सशक्त दस्तावेज बताया।

इस अवसर पर आयोजित काव्य संध्या में साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों और साहित्य प्रेमियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी