home page

विकसित भारत के लिए अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी : डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी

 | 
विकसित भारत के लिए अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी जरूरी : डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी


नई दिल्ली, 02 जुलाई (हि.स.)। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अकादमिक जगत, थिंक टैंक, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, शोध-आधारित नवाचार और संस्थागत सहयोग पर निर्भर करेगी।

डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने ये विचार रिसर्च एंड इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस), दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (डीएसई) तथा एमएसएमई फॉर 2047 के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम उन्हें नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

डॉ. लाहिड़ी ने कहा कि विश्वविद्यालय और शोध संस्थानों को समकालीन नीतिगत चुनौतियों के समाधान में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने शोध आधारित व्यावहारिक सुझावों के माध्यम से सरकारों के साथ निकट सहयोग बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि अकादमिक संस्थानों, उद्योग, थिंक टैंक और नीति-निर्माताओं के बीच सशक्त संवाद ही भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा को दिशा देगा।

कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य एवं पूर्व कैबिनेट सचिव राजीव गौबा, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल, आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. राम सिंह, डीएसई के पूर्व निदेशक प्रो. पुलिन बी. नायक और प्रो. पामी दुआ, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ. शमिक्का रवि सहित अनेक वरिष्ठ अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण में डॉ. लाहिड़ी को नई जिम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए कहा कि उनका आरआईएस से दो दशकों से अधिक पुराना जुड़ाव रहा है। उन्होंने कहा कि आरआईएस ने नीति आयोग के साथ सतत विकास लक्ष्यों, भारत की स्वैच्छिक राष्ट्रीय समीक्षा, दीर्घकालिक विकास रणनीति, समुद्री अर्थव्यवस्था और ब्लू इकोनॉमी जैसे विषयों पर मिलकर कार्य किया है तथा भविष्य में भी साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में सहयोग जारी रहेगा।

राजीव गौबा ने डॉ. लाहिड़ी को देश के सबसे प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री-प्रशासकों में से एक बताते हुए कहा कि सार्वजनिक वित्त, प्रशासन, बहुपक्षीय संस्थाओं और विधायी कार्यों का उनका व्यापक अनुभव नीति आयोग को भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति तैयार करने में नई दिशा देगा।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के निदेशक प्रो. राम सिंह ने डॉ. लाहिड़ी के आर्थिक शोध, संस्थान निर्माण और सार्वजनिक नीति में योगदान की प्रशंसा करते हुए विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के लिए शिक्षण संस्थानों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।

डीएसई के पूर्व निदेशक प्रो. पुलिन बी. नायक और प्रो. पामी दुआ ने डॉ. लाहिड़ी के शैक्षणिक योगदान और उनके द्वारा तैयार की गई अर्थशास्त्रियों एवं शोधकर्ताओं की पीढ़ियों का उल्लेख किया।

एमएसएमई फॉर 2047 की ओर से आदित्य पिट्टी ने कहा कि विकसित राष्ट्र बनने की भारत की आकांक्षा तभी साकार होगी, जब सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेंगे। शंतनु श्रीवास्तव ने एमएसएमई क्षेत्र को तकनीक, वित्तीय पहुंच, नीतिगत सुधार और सरकार-उद्योग-अकादमिक सहयोग के माध्यम से सशक्त बनाने की रूपरेखा प्रस्तुत की।

कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी