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आईपीयू में जलवायु-अनुकूल पर्यावरण प्रबंधन पर तकनीकी संगोष्ठी आयोजित

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आईपीयू में जलवायु-अनुकूल पर्यावरण प्रबंधन पर तकनीकी संगोष्ठी आयोजित


नई दिल्ली, 22 अगस्त (हि.स.)। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) ने विश्व मच्छर दिवस के अवसर पर “स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ समुदाय: बड़े प्रभाव के लिए छोटे कदम” थीम के तहत वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण पर तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन किया। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय बदलावों के बीच मलेरिया, डेंगू सहित वेक्टर जनित रोगों के बढ़ते जोखिम पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम का आयोजन शनिवार को आईपीयू के सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी एंड क्लाइमेट चेंज (सीएससीसी), यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट मैनेजमेंट (यूएसईएम) ने आईसीएमआर-राष्ट्रीय मलेरिया अनुसंधान संस्थान (एनआईएमआर), कैराह वुमेन फाउंडेशन और दिल्ली नगर निगम के सहयोग से किया। संगोष्ठी की अध्यक्षता यूएसईएम के डीन प्रो. वरुण जोशी ने की।

तकनीकी सत्र में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एनसीडीसी से डॉ. आकाश श्रीवास्तव ने “जलवायु जनित डेंगू और मलेरिया जोखिम ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव” विषय पर मुख्य व्याख्यान दिया। कैराह वुमेन फाउंडेशन की डॉ. रूप कुमारी ने जलवायु परिवर्तन, वेक्टर जनित रोगों और एकीकृत वेक्टर प्रबंधन के बीच संबंधों पर विचार रखे।

संगोष्ठी में “वन हेल्थ इन एक्शन” विषय पर पैनल चर्चा भी हुई। इसकी अध्यक्षता सीएससीसी, यूएसईएम के प्रमुख प्रो. प्रोद्युत भट्टाचार्य ने की, जबकि सह-अध्यक्षता प्रो. एन.सी. गुप्ता ने की। सत्र का संचालन आईसीएमआर-आरएमआरसी गोरखपुर के पूर्व निदेशक और आईसीएमआर में रोग उन्मूलन के अध्यक्ष डॉ. रजनी कांत ने किया।

पैनल में टीसीआई फाउंडेशन के राष्ट्रीय तकनीकी लीड एवं एनआईएमआर के पूर्व वैज्ञानिक जी डॉ. रमेश सी. धीमान, एनआईएमआर-आईसीएमआर के वैज्ञानिक जी डॉ. हिम्मत सिंह और दिल्ली नगर निगम की डॉ. अंजलि ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने वेक्टर नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, शहरी पर्यावरण प्रबंधन और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ लेकर चलने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान मलेरिया और वेक्टर जनित रोग नियंत्रण में उल्लेखनीय योगदान के लिए सर रोनाल्ड रॉस पुरस्कार राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र, दिल्ली की निदेशक डॉ. तनु जैन को प्रदान किया गया। वहीं वेक्टर नियंत्रण में उत्कृष्टता पुरस्कार पश्चिम बंगाल की आईडीएसपी की राज्य कीट विज्ञानी डॉ. सूरजिता बनर्जी को दिया गया।

छात्रों के लिए संवादात्मक सत्र और क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रमुख सिफारिशें प्रस्तुत की गईं और पुरस्कार वितरण किया गया।

संगोष्ठी का समापन जन-स्वास्थ्य संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, समुदायों और शहरी प्राधिकरणों के बीच सहयोग मजबूत करने की अपील के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि जलवायु-लचीले और स्वस्थ समुदायों के निर्माण के लिए वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम में समय रहते सामूहिक और पर्यावरण-अनुकूल कदम उठाना आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी