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शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आईपीयू ने आयोजित किया भारत-स्पेन संवाद

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शैक्षिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए आईपीयू ने आयोजित किया भारत-स्पेन संवाद


नई दिल्ली, 07 अप्रैल (हि.स.)। गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (आईपीयू) ने मंगलवार को अपने पूर्वी दिल्ली परिसर में द्विपक्षीय समन्वय : भारत-स्पेन संबंध और उच्च शिक्षा के अवसर पर एक उच्च स्तरीय संवाद आयोजित किया, जिसमें राजनयिक, शैक्षिक और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर स्पेन और एंडोरा में भारत के राजदूत जयंत के और एशिया पैसिफिक और मध्य पूर्व (सीएससी) के प्रबंध निदेशक समीर मित्तल ने भाग लिया। साथ ही विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, संकाय और छात्र भी उपस्थित थे।

आईपीयू के कुलपति प्रो (डॉ.) महेश वर्मा ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव को संरचित शैक्षिक साझेदारी में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय के नवाचार, अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्थिरता, स्वास्थ्य विज्ञान और प्रबंधन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वैश्विक सहयोग पर ध्यान केंद्रित करने पर प्रकाश डाला।

राजदूत ने वैश्विक आर्थिक और तकनीकी बदलाव के बीच भारत-स्पेन संबंधों की बढ़ती गहराई को रेखांकित किया और कहा कि उच्च शिक्षा इस साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उन्होंने भारत के जनसांख्यिकीय लाभ और अनुसंधान, गतिशीलता और ज्ञान आदान-प्रदान में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर जोर दिया, विशेष रूप से इस वर्ष को भारत-स्पेन संस्कृति, पर्यटन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता वर्ष के रूप में नामित किए जाने के संदर्भ में।

समीर मित्तल ने उद्योग-शैक्षिक संरेखण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि कौशल-आधारित शिक्षा, वैश्विक संपर्क और सहयोगात्मक ढांचे को बढ़ावा देने की आवश्यकता है जो छात्र रोजगार को बढ़ाते हैं।

चर्चा में छात्र और संकाय आदान-प्रदान, संयुक्त और दोहरी डिग्री कार्यक्रम, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम, अनुसंधान सहयोग और उद्योग-समर्थित पहल जैसे कार्यान्वयन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शहरी विकास, स्थिरता और भाषा अध्ययन जैसे उभरते क्षेत्र साझेदारी के लिए प्रमुख मार्ग के रूप में पहचाने गए।

संवाद का समापन भारतीय और स्पेनिश संस्थानों के बीच संरचित, परिणाम-आधारित सहयोग विकसित करने के साझा सहयोग की वचनबद्धता के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी