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इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन

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इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन


नई दिल्ली, 14 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें भारत के विभाजन से प्रभावित लाखों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का विषय था “भारत का विभाजन: उजड़ने, बिछड़ने और बसने की गाथा।”

कार्यक्रम को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने संबोधित करते हुए विभाजन की भयावह मानवीय क्षति पर प्रकाश डाला। उन्होंने विस्थापन और हानि की भयावहता को उजागर करते हुए इस बात पर जोर दिया कि आंकड़ों के पीछे बिछड़े परिवारों, छोड़े गए घरों और अस्त-व्यस्त समुदायों की कहानियां छिपी हैं। उन्होंने इन अनुभवों को संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ याद रखने के महत्व पर बल दिया।

डॉ. त्रिवेदी ने भारतीय सभ्यता और इतिहास में महिलाओं को प्राप्त विशिष्ट स्थान पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक रूप से महिलाओं को शक्ति का प्रतीक बताया। उन्होंने इस सांस्कृतिक लोकाचार के चिरस्थायी महत्व पर बल दिया और समकालीन भारत में महिलाओं की भागीदारी, गरिमा और नेतृत्व को मजबूत करने में महिलाओं की भूमिका को स्वीकार करते हुए, महिला सशक्तिकरण की दिशा में प्रधानमंत्री की पहलों की सराहना की।

इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. पूनम कुमरिया ने विभाजन को एक दूरस्थ ऐतिहासिक घटना के बजाय एक जीवंत इतिहास के रूप में याद रखने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विभाजन के पीड़ितों का लचीलापन, जिन्होंने भारी नुकसान और विस्थापन के बावजूद अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया, मानवीय भावना की शक्ति का एक चिरस्थायी प्रमाण है। उन्होंने छात्राओं से इस इतिहास का गहन अध्ययन करने और सहानुभूति, एकता, शांति और सद्भाव के पाठ सीखने की अपील की।

प्राचार्या ने भारत के अतीत का अध्ययन करने और वर्तमान के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता को समझने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करने वाले मंचों के निर्माण के प्रति महाविद्यालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्मृतियों को संजोना और लोगों के अनुभवों को सुनना एक अधिक समावेशी और करुणामय समाज के निर्माण के लिए आवश्यक है।

इस कार्यक्रम में छात्राओं, शिक्षकों और महाविद्यालय परिवार को विभाजन से प्रभावित लोगों की स्मृति में एक साथ लाया गया और इसका समापन उनकी स्मृतियों के प्रति संवेदना अर्पित करने और शांति, एकता और आपसी समझ के मूल्यों को बनाए रखने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी