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महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री सत्य, सादगी और लोक कर्तव्य के प्रतीक : विजेंद्र गुप्ता

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महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री सत्य, सादगी और लोक कर्तव्य के प्रतीक : विजेंद्र गुप्ता


नई दिल्ली, 02 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि महात्मा गांधी ने यह दिखाया कि नैतिक साहस किसी राष्ट्र को दिशा दे सकता है, जबकि भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री ने यह सिद्ध किया कि सादगी, ईमानदारी और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा नेतृत्व के सर्वोच्च मानदंड निर्धारित कर सकती है। उनका जीवन हमें निरंतर यह स्मरण कराता है कि सार्वजनिक जीवन की वास्तविक शक्ति चरित्र, संकल्प और राष्ट्रसेवा में निहित होती है। यह बात विजेंद्र गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में महात्मा गांधी की 157वीं जयंती तथा भारत रत्न एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कही।

इस अवसर पर दिल्ली विधानसभा के उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, विधायक अजय महावर, करनैल सिंह, राज कुमार भाटिया और संजय गोयल ने भी दोनों महान विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित की।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह अवसर भारत के राष्ट्र-निर्माण की दो विशिष्ट, किंतु गहराई से जुड़ी हुई परंपराओं को सामने लाता है। महात्मा गांधी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के केंद्र में सत्य, अहिंसा और नैतिक आचरण को स्थापित किया तथा नैतिक संकल्प को सामूहिक जनशक्ति के एक प्रभावी साधन में परिवर्तित किया। वहीं, भारत की यात्रा के एक अलग दौर में लाल बहादुर शास्त्री अनुशासन, विनम्रता और राष्ट्रीय चुनौतियों के समय दृढ़ नेतृत्व के प्रतीक बने।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इसलिए दोनों महापुरुषों की जयंती का एक ही दिन होना केवल स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि उन मूल्यों पर चिंतन करने का अवसर भी है, जो भारत के लोकतांत्रिक और संस्थागत जीवन को निरंतर दिशा प्रदान करते रहने चाहिए।

भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री की विरासत का स्मरण करते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि उनका “जय जवान, जय किसान” का आह्वान देश के सैनिकों और किसानों के प्रति सम्मान की स्थायी अभिव्यक्ति बना तथा राष्ट्रीय जीवन में उनकी केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि शास्त्री जी के नेतृत्व ने यह प्रदर्शित किया कि पद और अधिकार का अर्थ आडंबर नहीं है तथा निर्णायक शासन-व्यवस्था व्यक्तिगत सादगी के साथ भी कायम रह सकती है। भारत के इतिहास के एक चुनौतीपूर्ण दौर में राष्ट्रीय विश्वास को प्रेरित करने की उनकी क्षमता, अध्यक्ष ने कहा, उनके सार्वजनिक जीवन को ऐसी प्रासंगिकता प्रदान करती है, जो उनके कार्यकाल से कहीं आगे तक बनी हुई है।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इन महान विभूतियों की विरासत को सम्मान देने का सबसे सार्थक तरीका यह सुनिश्चित करना है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं जिम्मेदारी, पारदर्शिता और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली के माध्यम से नागरिकों का विश्वास निरंतर कायम रखें। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति का वास्तविक आकलन इस बात से होता है कि संस्थाएं उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन कितनी गंभीरता से करती हैं और नागरिकों के बीच कितना विश्वास उत्पन्न करती हैं। अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली विधानसभा भारत की लोकतांत्रिक विरासत को सुदृढ़ बनाए रखने के साथ-साथ संस्थागत गरिमा, जवाबदेही और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव