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डीयू के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय युवा कॉन्क्लेव आयोजित

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डीयू के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय युवा कॉन्क्लेव आयोजित


नई दिल्ली, 16 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के इंद्रप्रस्थ महिला महाविद्यालय में भारतीय वर्ल्ड अफेयर्स परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के सहयोग से ‘अंतरराष्ट्रीय युवा कॉन्क्लेव–2026’ का आयोजन किया गया। कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “परिवर्तित विश्व व्यवस्था में भारतीय विदेश नीति: सुरक्षा, विकास और वैश्विक नेतृत्व के बीच संतुलन” रहा।

इस अवसर पर देशभर के विद्वानों, नीति विशेषज्ञों और स्नातक छात्रों ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े समसामयिक मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का उद्देश्य वैश्विक घटनाक्रमों पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देना और युवाओं, विशेषकर छात्राओं, में वैश्विक व्यवस्था की समझ को सुदृढ़ करना बताया गया।

कॉन्क्लेव का आयोजन आईसीडब्ल्यूए के साथ हुए एक समझौता ज्ञापन के तहत किया गया, जिसका लक्ष्य युवाओं में विदेश नीति के प्रति जागरूकता और सहभागिता बढ़ाना है। उद्घाटन सत्र में “वसुधैव कुटुंबकम” के सिद्धांत को भारतीय विदेश नीति का आधार स्तंभ बताते हुए नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण का उल्लेख किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ विनय सहस्रबुद्धे रहे। उनके साथ आईसीडब्ल्यूए की रिसर्च फेलो हिमानी पंत भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. पूनम कुमारिया ने की।

प्रो. पूनम कुमारिया ने शिक्षा और नीति संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन युवा महिलाओं को सशक्त बनाने और उनमें तार्किक सोच विकसित करने में सहायक हैं। वहीं, डॉ. सहस्रबुद्धे ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा उसके सैद्धांतिक नेतृत्व पर आधारित है। उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के योगदान को भी स्मरण किया।

चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि वैश्वीकरण के इस दौर में युवाओं के लिए भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं और मानवीय मूल्यों को समझना अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने महाविद्यालय के संग्रहालय और अभिलेखागार का भी अवलोकन किया और संस्थान की ऐतिहासिक विरासत की सराहना की।

यह आयोजन आईसीडब्ल्यूए के ‘विदेश नीति जागरूकता अनुदान’ के सहयोग से सम्पन्न हुआ। आयोजकों के अनुसार, यह कॉन्क्लेव भविष्य में अंतरराष्ट्रीय विमर्श में सक्रिय भूमिका निभाने वाली जागरूक और सक्षम युवतियों को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी