डीएमआरसी ने पीतमपुरा–प्रशांत विहार मेट्रो स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज का प्रस्ताव किया तैयार
नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने पीतमपुरा–प्रशांत विहार मेट्रो स्टेशन तक प्रशांत विहार और रोहिणी क्षेत्र की ओर से बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आउटर रिंग रोड पर फुट ओवर ब्रिज के निर्माण का एक प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव आवश्यक स्वीकृति के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भेजा गया है। यह जानकारी बुधवार को दिल्ली विधानसभा की ओर से जरिए एक विज्ञप्ति में दी गई है।
यह पहल दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद सामने आई है। उन्हें विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (आरडब्ल्यूए), विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिक कल्याण संघ, प्रशांत विहार से शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इन शिकायतों में मजलिस पार्क–दीपाली चौक कॉरिडोर के तहत प्रशांत विहार की ओर से मेट्रो स्टेशन तक सुरक्षित और सीधी पहुंच के अभाव को प्रमुखता से उठाया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय द्वारा डीएमआरसी को लिखे गए पत्र में इस समस्या के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया था। पत्र में यह उल्लेख किया गया कि वर्तमान में स्टेशन तक पहुंच केवल पीतमपुरा की ओर से उपलब्ध है, जिससे स्थानीय निवासियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
डीएमआरसी ने अपने उत्तर में बताया कि फुट ओवर ब्रिज का प्रस्ताव तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। इसके लिए मौजूदा पीडब्ल्यूडी फ्लाईओवर के नीचे आवश्यक ऊंचाई (हेडरूम) सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सड़क कांग्रेस (आईआरसी) और राष्ट्रीय भवन संहिता (एनबीसी) के मानकों के अनुसार सड़क संरचना में कुछ बदलाव करने होंगे। प्रस्ताव फिलहाल पीडब्ल्यूडी के पास स्वीकृति के लिए लंबित है और आवश्यक मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, डीएमआरसी ने पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए एंट्री/एग्जिट-1 के पास जेब्रा क्रॉसिंग, बेहतर मार्ग व्यवस्था और ग्राउंड लेवल से कॉनकोर्स स्तर तक लिफ्ट सुविधा जैसे उपाय भी प्रस्तावित किए हैं। ये सभी उपाय स्टेशन के मल्टी-मोडल इंटीग्रेशन प्लान का हिस्सा हैं, जिसे यूटीटीआईपेक को स्वीकृति के लिए भेजा गया है और स्वीकृति के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा लागू किया जाएगा।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि प्रस्तावित कदम स्वागत योग्य हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि बुनियादी ढांचा पूर्णतः सुरक्षित, समावेशी और उपयोगकर्ता-अनुकूल हो। उन्होंने कहा कि मेट्रो जैसी सार्वजनिक सुविधाओं का लाभ तभी सार्थक होता है, जब हर नागरिक, विशेषकर हमारे वरिष्ठ नागरिक बिना किसी कठिनाई के इसका उपयोग कर सकें। उनकी सुविधा और गरिमा का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

