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दिल्ली में जल आपूर्ति और सीवर नेटवर्क से संबंधी कई बड़ी परियोजना पर काम जारी : रेखा गुप्ता

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दिल्ली में जल आपूर्ति और सीवर नेटवर्क से संबंधी कई बड़ी परियोजना पर काम जारी : रेखा गुप्ता


नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पेयजल आपूर्ति, सीवर नेटवर्क, एसटीपी, ड्रेनेज और जल प्रबंधन को लेकर लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय के माध्यम से एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) से 2,500 करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया गया है। इसके तहत करीब 1,741 करोड़ रुपये की दो परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। परियोजनाओं की 70 प्रतिशत फंडिंग एडीबी और 30 प्रतिशत दिल्ली सरकार करेगी।

दिल्ली जल बोर्ड ने वजीराबाद वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के कमांड एरिया में जल आपूर्ति सुधार के लिए पैकेज-1 (805 करोड़ रुपये) और पैकेज-2 (935 करोड़ रुपये) मंजूर किए हैं। इस अवसर पर दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह भी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय में आज संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी में सुचारू पेयजल आपूर्ति को लेकर दिल्ली सरकार लगातार गंभीर प्रयास कर रही है। इसके लिए पूरी दिल्ली का ध्यान रखा जा रहा है। जल बोर्ड की परियोजनाओं की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि करीब 43.96 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 9 यूजीआर कमांड एरिया और 8 विधानसभा क्षेत्रों को आधुनिक जल वितरण व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। मुखर्जी नगर, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी, आजादपुर, केशवपुरम, पीतमपुरा, शालीमार बाग, त्रिनगर, पश्चिम विहार, रानी बाग, वजीरपुर और अशोक विहार जैसे बड़े रिहायशी इलाकों को इसका लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत करीब 836 किलोमीटर का जल वितरण नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिसमें लगभग 570 किलोमीटर नई या बदली जाने वाली पाइपलाइन शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिल्ली में ऐसी जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें लोगों को चौबीस घंटे सातों दिन प्रेशर के साथ पानी मिले और हर कनेक्शन का हिसाब हो। इस व्यवस्था में एससीएडीए, इंस्ट्रूमेंटेशन, स्मार्ट मीटरिंग और एनआरडब्ल्यू मॉनिटरिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। 131 डिस्ट्रिक्ट मीटर्ड एरियाज बनाए जाएंगे। इनके माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि सिस्टम में कितना पानी डाला गया, कितना कंज्यूमर तक पहुंचा और रास्ते में कितना पानी लॉस हुआ। इससे लीकेज और अवैध कनेक्शंस जैसी समस्याओं की पहचान और नियंत्रण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।

प्रोजेक्ट्स में नॉन-रेवेन्यू वॉटर (एनआरडब्ल्यू) को 15 प्रतिशत तक लाने का टार्गेट रखा गया है। इसके लिए नेटवर्क रिहैबिलिटेशन, एक्यूरेट मीटरिंग, डीएमए-बेस्ड मॉनिटरिंग और सिस्टेमैटिक लीकेज रिडक्शन को एक साथ लागू किया जाएगा। लगभग 2.15 लाख हाउस सर्विस कनेक्शंस इस प्रोजेक्ट के दायरे में आएंगे और कंज्यूमर कनेक्शंस की 100 प्रतिशत मीटरिंग की जाएगी। इससे वॉटर सप्लाई में ट्रांसपेरेंसी और साइंटिफिक अकाउंटिंग को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में जल आपूर्ति व्यवस्था में बड़े बदलाव का दायरा वजीराबाद तक सीमित नहीं है। पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के दो जोन में 11,427 करोड़ रुपये के निवेश की योजना आगे बढ़ाई गई है। इससे करीब 36.4 लाख लोगों को बेहतर जल आपूर्ति व्यवस्था का लाभ मिलेगा और लगभग 3,830 किलोमीटर के नेटवर्क को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को अर्बन चैलेंज फंड के माध्यम से आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत 25 प्रतिशत फंडिंग भारत सरकार, 25 प्रतिशत दिल्ली सरकार और बाकी 50 प्रतिशत लोन/पीपीपी मॉडल से जुटाने का प्रस्ताव है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि शकूर बस्ती के हर्ष विहार में 18 एमएलडी क्षमता का नया अंडरग्राउंड रिजर्वायर विकसित किया जाएगा। वहीं ओखला विधानसभा क्षेत्र के बाटला हाउस और अबुल फजल एन्क्लेव में 2.2 एमजीडी और 3.7 एमजीडी क्षमता के यूजीआर तथा बूस्टर पंपिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जिससे लगभग 2 लाख निवासियों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली की सीवर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 28 नए डिसेंट्रलाइज्ड एसटीपी बनाने की करीब 2,990 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के वर्क ऑर्डर जारी कर काम शुरू हो चुका है। पुराने एसटीपी को अपग्रेड करने के लिए भी करीब 1,090 करोड़ रुपये के वर्क ऑर्डर जारी किए गए हैं। इसके अलावा 114 अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 2,012 करोड़ रुपये की लागत से सीवर नेटवर्क का काम पूरा हो चुका है और इन इलाकों के 1,28,633 घरों को हाउस सीवर कनेक्शन दिए जा चुके हैं। वहीं, 276 कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क का काम अभी चल रहा है, जबकि 647 अनधिकृत कॉलोनियों में करीब 5,44,680 घरों को हाउस सीवर कनेक्शन देने का काम प्रगति पर है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि द्वारका में 50 एमजीडी, चंद्रावल में 105 एमजीडी और बवाना में 2 एमजीडी क्षमता के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा बिजवासन, पल्ला, सिरसपुर में यूजीआर भी पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रावल कमांड एरिया में पाइपलाइन विस्तार नेटवर्क अपग्रेडेशन के लिए 1,200 करोड़ रुपये की लागत से प्रगति पर है। यह परियोजना दिल्ली के कई विधानसभा क्षेत्रों की वॉटर सप्लाई को मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड के लगभग 18,000 कर्मचारियों एवं पेंशनर्स को कैशलेस हेल्थ सर्विसेज की सुविधा से जोड़ा गया है। इससे उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त करने में अधिक सुविधा मिलेगी। साथ ही दिल्ली जल बोर्ड की कॉलोनियों और लैंड एसेट्स के बेहतर मैनेजमेंट एवं री-डेवलपमेंट के लिए ट्रांजिशन एडवाइजर नियुक्त किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली की जल सुरक्षा केवल साफ पानी की आपूर्ति बढ़ाने तक सीमित नहीं है। ट्रीटेड सीवेज के पानी का भी उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। दिल्ली में करीब 750 एमजीडी सीवेज का ट्रीटमेंट किया जाता है। पर्यावरणीय प्रवाह को ध्यान में रखने के बाद इसमें से करीब 483 एमजीडी ट्रीटेड पानी दोबारा इस्तेमाल के लिए उपलब्ध है, जबकि फिलहाल करीब 120 एमजीडी पानी का ही पुन: उपयोग हो रहा है। इस ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल बागवानी, निर्माण कार्य, लैंडस्केपिंग, धुलाई, औद्योगिक कूलिंग और अन्य गैर-पेय जरूरतों के लिए किया जाएगा। इसकी दर जल बोर्ड के इंफ्रास्ट्रक्चर या तय एसटीपी फिलिंग पॉइंट्स से लेने पर 8 रुपये प्रति किलोलीटर होगी। वहीं, जहां उपभोक्ता खुद पानी पहुंचाने की व्यवस्था करता है, वहां सामान्य गैर-पेय उपयोग के लिए इसकी दर 5 रुपये प्रति किलोलीटर निर्धारित की गई है। इससे दिल्ली को पानी की एकतरफा खपत वाली व्यवस्था से निकालकर पानी के दोबारा इस्तेमाल पर आधारित सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी की ओर ले जाने में मदद मिलेगी।

वहीं दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि पिछले डेढ़ साल में सरकार ने राजधानी में जल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसके तहत जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वॉटर मास्टर प्लान और सीवरेज नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में ट्रैफिक पुलिस द्वारा जलभराव वाले कुल 169 स्थानों की पहचान की गई थी, जिनमें से वर्तमान में 60 स्थानों पर काम किया जा रहा है। ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत बड़े नालों का निर्माण किया जा रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव