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विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ने किया आह्वान

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विजेंद्र गुप्ता ने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़ने किया आह्वान


नई दिल्ली, 25 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि एक सशक्त लोकतंत्र का निर्माण तब होता है, जब उसके युवा उसकी संस्थाओं, विचारों और प्रक्रियाओं से सक्रिय रूप से जुड़ते हैं। यह बात विजेंद्र गुप्ता ने आज दिल्ली विधानसभा में किरोड़ी मल कॉलेज और रामजस कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने विधानसभा की प्रमुख युवा संपर्क पहल के अंतर्गत आयोजित संवादात्मक सत्र के दौरान युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।

भारत के युवाओं और शासन-व्यवस्था के बीच की दूरी को पाटने के उद्देश्य से दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा संचालित यह सुव्यवस्थित पहल विधायी प्रक्रियाओं को सरल एवं सुगम बनाने तथा जेन-जी के बीच गहरी नागरिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास है। आज की जेन-जी एक गतिशील और डिजिटल रूप से जुड़ी पीढ़ी है, जो उद्देश्यपूर्ण सोच, सामाजिक जागरूकता और जवाबदेही की भावना से प्रेरित है। इस पीढ़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के वास्तविक स्वरूप से जोड़कर उनकी ऊर्जा और जुनून को सूचित नागरिक भागीदारी में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे वे भारत के भविष्य के सक्रिय सह-निर्माता बन सकें।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को भारत की संसदीय विरासत की एक समृद्ध और अनुभवात्मक यात्रा कराई गई, जिसकी शुरुआत ऐतिहासिक विधानसभा भवन के महत्व और विरासत से हुई। वर्ष 1912 में निर्मित यह ऐतिहासिक भवन पूर्व में केंद्रीय विधान सभा का सदन रहा है और श्री विट्ठलभाई पटेल जैसी महान विभूतियों की अविस्मरणीय विरासत को अपने भीतर संजोए हुए है। विद्यार्थियों को वर्ष 1993 में पुनर्गठित दिल्ली विधानसभा के बाद से लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में विधानसभा की निरंतर भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई।

विद्यार्थियों की समझ को और गहरा करने के लिए कार्यक्रम में विधायी प्रक्रियाओं पर एक व्यापक परिचयात्मक सत्र आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें यह समझाया गया कि कानून किस प्रकार तैयार किए जाते हैं, उन पर चर्चा एवं विचार-विमर्श कैसे होता है तथा उन्हें किस प्रक्रिया के माध्यम से पारित किया जाता।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि लोकतांत्रिक समाज की जीवंतता एक जागरूक, सूचित और सक्रिय युवा पीढ़ी पर निर्भर करती है। लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रत्यक्ष रूप से कार्य करते हुए देखने और समझने के माध्यम से युवा नागरिक अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा, ऊर्जा और प्रेरणा को सार्थक नागरिक सहभागिता, जवाबदेही और जनसेवा की दिशा में आगे बढ़ा सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव