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मुख्यमंत्री ने डीपीसीसी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का किया शुभारंभ, ‘जन सुझाव पोर्टल’ भी शुरु

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मुख्यमंत्री ने डीपीसीसी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का किया शुभारंभ, ‘जन सुझाव पोर्टल’ भी शुरु


नई दिल्ली, 01 अक्टूबर (हि.स.)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत शास्त्री पार्क स्थित दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) आईटी पार्क में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) का शुभारंभ किया।

यह अत्याधुनिक केंद्र दिल्ली में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की रियल-टाइम निगरानी, एआई आधारित विश्लेषण, शिकायतों एवं फील्ड निरीक्षण की जानकारी के एकीकरण तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय को मजबूत करेगा। इसका उद्देश्य केवल प्रदूषण संबंधी आंकड़े एकत्र करना नहीं, बल्कि तकनीक से प्राप्त जानकारी को त्वरित फील्ड कार्रवाई और मापने योग्य परिणामों में बदलना है।

इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा, विधायक अरविंदर सिंह लवली सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए सरकार का ध्यान केवल निगरानी तक सीमित नहीं है। तकनीक, डेटा और फील्ड प्रवर्तन को एक साथ जोड़कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। आईसीसीसी के माध्यम से प्रदूषण हॉटस्पॉट, नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों की पहचान तेजी से की जा सकेगी तथा संबंधित विभागों तक इसकी जानकारी पहुंचाकर मौके पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस पूरी व्यवस्था का मूल मंत्र ‘डिटेक्ट, एनालाइज, एक्ट, वेरिफाई’ है, यानी समस्या की पहचान, उसका विश्लेषण, तत्काल कार्रवाई और कार्रवाई के परिणाम का सत्यापन। दिल्ली सरकार प्रदूषण के खिलाफ 12 महीने और 24×7 निरंतर प्रयास कर रही है। मैकेनिकल रोड स्वीपिंग, धूल नियंत्रण, स्मॉग गन, मिस्ट स्प्रे, निर्माण स्थलों की निगरानी, हरित क्षेत्र बढ़ाने, स्वच्छ परिवहन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सहित प्रदूषण के प्रत्येक प्रमुख स्रोत पर एक साथ काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आईसीसीसी से प्राप्त रियल-टाइम जानकारी को फील्ड स्तर की कार्रवाई से सीधे जोड़ा जाएगा। प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान के बाद संबंधित विभाग को कार्रवाई के लिए अलर्ट किया जा सकेगा और जीपीएस आधारित फील्ड वाहनों के माध्यम से टीमों की गतिविधियों की निगरानी भी की जाएगी। इस वर्ष सर्दियों के दौरान 78 सब-डिविजन स्तर की टीमें केंद्र के माध्यम से निगरानी एवं प्रवर्तन कार्यों में जुटेंगी। इससे तकनीक से सामने आई समस्या और मौके पर होने वाली कार्रवाई के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क की धूल, खुले में कचरा जलाने और निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए फील्ड निगरानी को तकनीक से जोड़ा जा रहा है। ‘वायुदूत’ टीमों के माध्यम से प्रदूषणकारी गतिविधियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी, जबकि उनके बॉडी कैमरों को कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा, जिससे फील्ड गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। दिल्ली में कार्यरत मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों को भी जीपीएस से जोड़ा गया है। आईसीसीसी के माध्यम से मशीनों की लोकेशन, तय क्षेत्र में सफाई, तय दूरी और कार्य अवधि की निगरानी की जा सकेगी। इससे सफाई एवं प्रदूषण नियंत्रण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई को और मजबूत किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान शुरू किए गए ‘जन सुझाव’ पोर्टल का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में जनभागीदारी को मजबूत करना भी सरकार की प्राथमिकता है। नागरिक अपने सुझाव, शिकायतें, प्रदूषण से जुड़ी समस्याएं या प्रदूषण कम करने की दिशा में किए गए अच्छे कार्यों की जानकारी इस पोर्टल के माध्यम से साझा कर सकेंगे। शिकायत मिलने पर संबंधित विषय पर कार्रवाई की जा सकेगी, उपयोगी सुझावों को व्यवस्था में शामिल किया जा सकेगा और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में नागरिकों द्वारा किए जा रहे अच्छे प्रयासों को भी दर्ज एवं प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

इस अवसर पर दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करने के लिए 24x7 अत्याधुनिक आईसीसीसी तैयार किया गया है, जिसे छह माह के निर्धारित लक्ष्य से पहले पूरा कर लिया गया है। यहां 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र वाली 700 से ज्यादा निर्माण साइट्स की एआई और सीसीटीवी से लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है तथा पीएम10 बढ़ने पर संबंधित विभाग और साइट मालिक को तत्काल सूचना दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि आईसीसीसी से दिल्ली के सभी एक्यूआई स्टेशनों, पिछले वर्षों के डेटा, स्थानीय प्रदूषण कारणों और रोड स्वीपिंग मशीनों की लोकेशन, रूट व संचालन की निगरानी होगी। नए कैमरों से खुले में कचरा और बायोमास जलाने पर नजर रखी जाएगी, जबकि उद्योगों व प्रदूषणकारी साइट्स के निरीक्षण पर जाने वाले डीपीसीसी अधिकारियों के लिए बॉडी कैमरा अनिवार्य किए गए हैं, जिससे कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री जी द्वारा शुरू किए गए ‘जन सुझाव पोर्टल’ के जरिए नागरिकों से सुझाव मांगे जा रहे हैं और उल्लेखनीय योगदान देने वालों को सम्मानित किया जाएगा। 70 लाख के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 72 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं और अभियान जारी है। सरकार का लक्ष्य जनभागीदारी के साथ प्रदूषण को नियंत्रित कर ग्रेप स्टेज-4 जैसी स्थिति से बचना है। आईसीसीसी में शिफ्टों में 24x7 अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहेंगे और उनके लिए भोजन, किचन, पैंट्री, मेस व बंक-बेड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी