दिल्ली लक्ष्मी योजना पर सदन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष के सवालों का दिया जवाब, बोलीं- सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक
नई दिल्ली, 10 अगस्त (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन सोमवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली लक्ष्मी योजना को लेकर सदन में उठाए गए विभिन्न सवालों का विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि दिल्ली लक्ष्मी योजना दिल्ली की अब तक की सबसे बड़ी जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य दिल्ली की उन महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना है, जो अपने परिवार और घर की जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाती हैं, लेकिन उनके श्रम की आर्थिक कीमत अक्सर सामने नहीं आती।
मुख्यमंत्री ने सदन में कहा कि दिल्ली लक्ष्मी योजना के फॉर्म और रजिस्ट्रेशन को लेकर भी सदन में चर्चा हुई। उन्होंने सदन को योजना की तत्काल स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 5,92,406 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि एक अगस्त को पोर्टल शुरू हुआ था और 10 अगस्त तक मात्र 10 दिनों में लगभग 6 लाख रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। यह आंकड़ा दिल्ली की बहनों में योजना के प्रति उत्साह और विश्वास को दर्शाता है। सरकार ने फिलहाल 17 लाख लाभार्थियों की सीमा रखी है। जब तक 17 लाख बहनों को योजना के तहत निर्धारित राशि नहीं दी जाती, तब तक रजिस्ट्रेशन पोर्टल बंद नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो सदस्य सामने वाली कुर्सियों पर बैठे थे और बड़ी बुलंद आवाज में दिल्ली की बहनों के हितैषी बनने का दावा कर रहे थे, उन्हें इस बात का अफसोस है कि जब उसी दिल्ली की बहनों की चर्चा सदन में हो रही थी, तब उनमें उनके जवाब सुनने का साहस नहीं था। इसी कारण वे सदन से बाहर चले गए। उनकी इच्छा थी कि एक-एक विधायक, जिन्होंने सदन में जितनी भी बातें कही हैं, वे उनका जवाब सुनकर जाते। उन्होंने विपक्ष के विधायकों को खुले तौर पर चुनौती भी दी थी कि यदि उनमें हिम्मत है तो वे उनका जवाब अवश्य सुनें। लेकिन उन्हें मालूम है कि उनकी बात में कहीं से कहीं तक कोई सच्चाई नहीं है, इसीलिए वे उनका जवाब सुनने के लिए सदन में रुक नहीं पाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली लक्ष्मी योजना दिल्ली राज्य की अब तक की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। उन्होंने दावे के साथ कहा कि आज तक किसी भी सरकार ने चाहे वह 15 साल वाली सरकार रही हो या 11 साल वाली सरकार दिल्ली की किसी बहन के लिए इससे बड़ी योजना नहीं दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है और जो संकल्प लिया था, उसे धरातल पर उतारा है। इसके लिए 5,100 करोड़ रुपये की बड़ी राशि दिल्ली की बहनों के लिए निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि 17 लाख बहनों का लक्ष्य इस योजना के तहत रखा गया है। ये दिल्ली की वे 17 लाख बहनें हैं जो वास्तव में जरूरतमंद हैं और जिन्हें इस आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। पहले चरण में इस योजना को तीन वर्ष के लिए रखा गया है, ताकि पहले 17 लाख बहनों को इसका लाभ दिया जा सके। इसके बाद यदि योजना का विस्तार करना हुआ तो सरकार को इसमें कोई गुरेज नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग बार-बार यह कह रहे थे कि योजना में बहुत सारी शर्तें लगाई गई हैं और दिल्ली की बहनों को इसका लाभ कैसे मिलेगा। इनमें तीन बच्चों से संबंधित शर्त का भी उल्लेख किया जा रहा था और कभी किसी का नाम लिया जा रहा था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी परिवार ने अपने परिवार की योजना बनानी है या परिवार का विस्तार करना है तो वह किसी की इजाजत लेने के लिए बाध्य नहीं है। प्रत्येक परिवार अपनी जरूरतों और परिस्थितियों के अनुसार अपने परिवार की योजना बनाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ध्येय स्पष्ट है कि कोई भी महिला केवल बच्चे पैदा करने की मशीन नहीं है। महिलाओं का स्वास्थ्य सरकार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसी संकीर्ण मानसिकता, जिसके अंतर्गत यदि किसी परिवार में बेटा नहीं है तो महिलाओं को बेटे की चाह में परिवार बढ़ाते जाने के लिए मजबूर किया जाता है, दिल्ली सरकार ऐसी किसी भी मानसिकता का समर्थन नहीं करती।
मुख्यमंत्री ने इसके बाद योजना में डिजिटल वॉलेट के माध्यम से दी जाने वाली राशि को लेकर उठाए जा रहे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने बताया कि 1,000 रुपये डिजिटल वॉलेट में दिए गए हैं, जबकि 1,500 रुपये की राशि एफडी/आरडी में बचत के रूप में जमा की जाएगी। यह बहुत सोच-समझकर बनाई गई नीति है, ताकि बहनों के पास घर-खर्च और दैनिक आवश्यकताओं के लिए हाथ में पैसा भी रहे और 1,500 रुपये की राशि बचत के रूप में जमा होती रहे। जब तीन वर्ष बाद यह राशि एकमुश्त मिलेगी, तो ब्याज सहित यह लगभग 60,000 रुपये का एक बड़ा अमाउंट होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

