मुख्यमंत्री ने महिलाओं के साथ मनाया हरियाली तीज का उत्सव
नई दिल्ली, 09 अगस्त (हि.स.)। सावन की रिमझिम फुहारों और तीज के उल्लास के बीच आज पीतमपुरा स्थित दिल्ली हाट में हरियाली तीज का रंग देखने को मिला। मेहंदी की सौंधी खुशबू, लोकगीतों की मधुर तान और पारंपरिक नृत्यों की रंगीन छटा के बीच आयोजित तीज उत्सव में दिल्ली की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी कार्यक्रम में शामिल होकर महिलाओं के साथ तीज की खुशियां साझा कीं और उन्हें पर्व की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विधायक राजकुमार भाटिया,तिलक राम गुप्ता, पूनम शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाली तीज केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम, प्रकृति और नारी शक्ति का उत्सव है। सावन की हरियाली और उत्सव के रंगों के बीच यह पर्व मां पार्वती और भगवान शिव के अटूट प्रेम एवं पुनर्मिलन की पावन गाथा को स्मरण करने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ-साथ समाज में प्रेम, सौहार्द और आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीतमपुरा दिल्ली हाट में तीज के अवसर पर जिस तरह महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों, मेहंदी, लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से अपनी संस्कृति की खूबसूरती को प्रस्तुत किया, वह हमारी समृद्ध विरासत की जीवंत झलक है। दिल्ली सरकार का प्रयास है कि राजधानी में ऐसे सांस्कृतिक मंचों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाए, जहां हमारी लोक परंपराओं और कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ कलाकारों एवं शिल्पकारों को भी अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिले।
मुख्यमंत्री ने सभी बहनों को हरियाली तीज की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि भगवान महादेव और मां पार्वती सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशियां प्रदान करें। उन्होंने कहा कि हमारी परंपराओं और त्योहारों की यही जीवंतता दिल्ली की सांस्कृतिक आत्मा को और मजबूत बनाती है।
दिल्ली पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय तीज महोत्सव 8 और 9 अगस्त को पीतमपुरा और आईएनए स्थित दिल्ली हाट में आयोजित किया गया। महोत्सव में महिलाओं के लिए मेहंदी, बिंदी, रंगोली, ‘तीज क्वीन-मिस तीज 2026’ और बेस्ट ड्रेस फीमेल जैसी प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जबकि बच्चों और परिवारों के लिए किड्स जोन, सावन के झूले, सरप्राइज गिफ्ट्स और म्यूजिकल चेयर जैसी गतिविधियां आकर्षण का केंद्र रहीं। महोत्सव में करीब 20 फूड स्टॉल और 80 हस्तशिल्प एवं हथकरघा स्टॉल लगाए गए, जहां आगंतुकों को पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय कला-शिल्प का अनुभव मिला। इससे स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों को भी अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और नए अवसर प्राप्त करने का मंच मिला।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

