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दिल्ली आबकारी नीति को लेकर आआपा और केजरीवाल को सिरसा ने सदन में घेरा

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दिल्ली आबकारी नीति को लेकर आआपा और केजरीवाल को सिरसा ने सदन में घेरा


नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा में पुरानी आबकारी नीति पर सीएजी की रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान आज कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पिछली आम आदमी पार्टी (आआपा) की सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को घेरा। उन्होंने कहा कि “अरविंद केजरीवाल आप जितने भी तिकड़मबाजी के रास्ते निकाल लें, लेकिन इस घोटाले का हिसाब देना पड़ेगा। यह दिल्ली के लोगों का पैसा है और इसकी जवाबदेही तय होकर रहेगी।

सिरसा ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट और पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) की टिप्पणियां यह दिखाती हैं कि कई विभागों में गड़बड़ियां हुईं, लेकिन आबकारी नीति सबसे बड़ा उदाहरण है।

सिरसा ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट साफ बताती है कि यह कोई गलती नहीं थी, बल्कि जानबूझकर बनाई गई नीति थी। शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, बिजली, लगभग हर विभाग में गड़बड़ियां सामने आई हैं, लेकिन आबकारी नीति सबसे बड़ा घोटाला है।

मंत्री ने बताया कि सीएजी रिपोर्ट के अनुसार 17 नवंबर 2021 से 31 अगस्त 2022 के बीच दिल्ली को लगभग 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह नीति कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई थी। पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर इसे लागू किया गया।

सिरसा ने नीति में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि 77 होलसेलर की संख्या घटाकर 13 कर दी गई, जिससे एकाधिकार की स्थिति बनी। इन 13 में से केवल 3 कंपनियों ने लगभग 77.7 फीसद बाजार पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि एक खुला बाजार खत्म करके इसे कार्टेल में बदल दिया गया। यह बाजार पर कब्जा करने की साजिश थी।

मंत्री ने लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन कंपनियों की आमदनी बहुत कम थी, जिनका कोई मुनाफा नहीं था, यहां तक कि जिनकी नेट वर्थ भी नेगेटिव थी, उन्हें भी बड़े-बड़े जोन दे दिए गए। यह सभी नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी कंपनियों को भी काम दिया गया, जिन्होंने पहले कभी मुनाफा नहीं दिखाया या घाटे में चल रही थीं।

सिरसा ने कोविड के दौरान 144 करोड़ की लाइसेंस फीस माफ करने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह जनता का पैसा है। अधिकारियों के मना करने के बावजूद इतनी बड़ी रकम माफ करना, यह बताता है कि इरादा क्या था। इसी का नतीजा था की ज़्यादा बिक्री के बावजूद सरकार को नुक़सान उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी बताया कि नॉन-कन्फॉर्मिंग क्षेत्रों में दुकानें न खुलने के कारण 900 करोड़ से अधिक की राहत दी गई, जिससे सरकार को भारी नुकसान हुआ।

मंत्री ने आरोप लगाया कि कई फैसले बिना जरूरी मंजूरी के लिए गए। कई अहम फैसले बिना सक्षम अधिकारी, यहां तक कि उपराज्यपाल को बताए बिना लिए गए। इससे पूरी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का भी मानना है कि हजारों पन्नों की चार्जशीट को यूं ही खारिज नहीं किया जा सकता। मामला गंभीर है और सच सामने आएगा।

मंत्री ने कहा कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। कोई भी कानून से ऊपर नहीं है। दिल्ली की जनता को सच्चाई और न्याय चाहिए। जिन्होंने जनता का पैसा लूटा है, उन्हें जवाब देना होगा। उन्होंने कहा कि “अरविंद केजरीवाल आप जितने भी तिकड़मबाजी के रास्ते निकाल लें, लेकिन इस घोटाले का हिसाब देना पड़ेगा। यह दिल्ली के लोगों का पैसा है, और इसकी जवाबदेही तय होकर रहेगी।

मंत्री ने सदन के सामने अरविंद केजरीवाल और पंजाब में चल रही आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिल्ली जैसा तथाकथित शराब घोटाला पंजाब में भी करने का आरोप लगाया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव