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बीएसएल का “ग्लोबल आउटरीच समिट-2.0” 28 अप्रैल से नई दिल्ली में

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बीएसएल का “ग्लोबल आउटरीच समिट-2.0” 28 अप्रैल से नई दिल्ली में


नई दिल्ली, 28 फ़रवरी (हि.स.)। ब्रांड्स एंड सोर्सिंग लीडर्स एसोसिएशन (बीएसएल) ने तीन दिवसीय “ग्लोबल आउटरीच समिट 2.0” की घोषणा शनिवार काे की। यह अंतरराष्ट्रीय समिट 28 से 30 अप्रैल तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित होगी।

बीएसएल के अध्यक्ष रमन दत्ता ने यूएस कॉम्प्लेक्स जसोला में आयाेजित पत्रकार वार्ता में बताया कि समिट में वैश्विक और घरेलू परिधान एवं लाइफस्टाइल ब्रांड्स, बाइंग हाउसेज के सीईओ, रिटेलर्स, मैन्युफैक्चरर्स, निवेशक और नीति-निर्माता एक मंच पर एकत्रित होंगे। इसका उद्देश्य है भारत को वैश्विक सोर्सिंग हब के रूप में मजबूत करना और संरचित व्यापार साझेदारियों को नई गति देना।

उन्होंने बताया कि बीएसएल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “फार्म टू फॉरेन” विजन से प्रेरित होकर कार्य कर रहा है, ताकि विश्व “मेड इन इंडिया” उत्पादों को अपनाए। संगठन का लक्ष्य फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाते हुए भारत के परिधान एवं टेक्सटाइल इकोसिस्टम को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाना है।

रमन दत्ता ने बताया कि बीएसएल ने वित्त वर्ष 2026–28 के दौरान 18,000 करोड़ के व्यापार सुविधा लक्ष्य का रोडमैप प्रस्तुत किया है। यह लक्ष्य उद्योग में ठोस आर्थिक परिणाम और निर्यात वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ग्लोबल आउटरीच समिट 2.0 का उद्देश्य इरादों को क्रियान्वयन में बदलना है। इसके साथ ही भारत के परिधान और टेक्सटाइल सेक्टर में भारत के बढ़ते वैश्विक विश्वास को दर्शाना है।

बीएसएल के को-चेयरमैन नीरज नागपाल ने कहा कि एक ऐसा संरचित प्लेटफॉर्म बना रहे हैं, जहां भारतीय ब्रांड्स वैश्विक मंच पर आगे बढ़ें और भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को दुनिया तक पहुंचाएं।

बीएसएल के फाउंडिंग मेंबर संजय शुक्ला ने कहा कि बीएसएल की ‘पंच पहल’ रणनीति के तहत सस्टेनेबिलिटी, सहयोग और वैश्विक श्रेष्ठ प्रथाओं को अपनाकर अगले दो वर्षों में 2 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने की योजना बनाई गई है।

अन्य वक्ताओं ने भी सस्टेनेबिलिटी, सीईओ-स्तरीय भागीदारी और वैश्विक सहयोग को इस समिट की प्रमुख विशेषताएं बताया।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल आउटरीच समिट 2.0 को भारत के परिधान एवं लाइफस्टाइल उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो देश को वैश्विक व्यापार मानचित्र पर और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी