दिल्ली भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गुरुद्वारा बंगला साहिब से रकाबगंज साहिब तक निकाली श्रद्धांजलि पदयात्रा
नई दिल्ली, 02 नवंबर (हि.स.)। वर्ष 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हुए नरसंहार में मारे गए निर्दोष लोगों की स्मृति में सोमवार को दिल्ली में श्रद्धांजलि पदयात्रा निकाली गई। ‘1984- कांग्रेस द्वारा सिखों का नरसंहार नहीं भूलेगा हिन्दुस्तान’ के नारे के साथ 1984 के पीड़ित परिवारों के सदस्यों, सिख संगत और दिल्ली भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब से गुरुद्वारा श्री रकाबगंज साहिब तक गुरुवाणी का जाप करते हुए पदयात्रा की। पदयात्रा के समापन पर नरसंहार में शहीद हुए सिखों की स्मृति में मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
दिल्ली भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत, सांसद बांसुरी स्वराज और वरिष्ठ भाजपा नेता राजीव बब्बर भी पदयात्रा में शामिल हुए। उनके साथ 1984 के पीड़ित परिवारों के सदस्य सरदार करतार सिंह, प्रीति सिंह कौर, जसवीर कौर, भागी कौर, परमजीत कौर और मनप्रीत कौर सहित सैकड़ों सिख महिलाएं, निहंग जत्थेदार, तिलक विहार निवासी प्रभावित परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे। पदयात्रा की व्यवस्था भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने संभाली।
इस अवसर पर सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिख समुदाय के लोगों को संगठित तरीके से निशाना बनाया गया। एक-एक घर की पहचान कर सिख परिवारों को बाहर निकाला गया और उनके साथ अमानवीय अत्याचार किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आम जनता का काम नहीं था, बल्कि कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थित एवं संरक्षित लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया।
सहरावत ने कहा कि कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और उनके जख्मों पर मरहम लगाने के लिए कभी गंभीर प्रयास नहीं किए। राहुल गांधी द्वारा एक बार फिर एक नवंबर के संदर्भ में राजनीति किए जाने से सिख समाज के पुराने जख्म फिर हरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि सिख समाज हमेशा देश और समाज के साथ खड़ा रहा है, लेकिन अन्याय और अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेगा।
उन्होंने राहुल गांधी से अपील की कि वे देश में अराजकता फैलाने और सिख समाज के जख्मों को कुरेदने का प्रयास न करें। सहरावत ने कहा कि 1984 में सिख परिवारों के साथ हुए अन्याय की पीड़ा आज भी समाज के मन में जीवित है और पीड़ित परिवार, विशेषकर उस दौर की पीड़ा झेलने वाली महिलाएं, न्याय के लिए एकजुट हैं।
भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि 1984 में सिख समुदाय के निर्दोष भाई-बहनों का कत्लेआम कांग्रेस की सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। स्वराज ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने एक नवंबर को रैली निकालकर उसी मानसिकता का परिचय दिया।
उन्होंने कहा कि एक नवंबर 1984 को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके संरक्षण में पल रहे उपद्रवियों ने सिख समुदाय के लोगों को जिंदा जला दिया था। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा उसी तारीख को रैली निकालना सिख समुदाय के पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने जैसा है। उन्होंने कहा कि सिख समाज वर्षों तक न्याय का इंतजार करता रहा, जबकि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी।
स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने 1984 के पीड़ित परिवारों को मुआवजा और नौकरियां देने के साथ दोषियों को सजा दिलाने का काम किया है। सज्जन कुमार को मिली सजा इसका उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की रैली में इंडिया गठबंधन के किसी भी नेता ने 1984 के सिख नरसंहार पर एक शब्द नहीं बोला।
संस्कृत की कहावत ‘मौनं स्वीकृति लक्षणम्’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं की चुप्पी कांग्रेस के कृत्यों पर उनकी सहमति दर्शाती है। स्वराज ने कहा कि राहुल गांधी ने रैली निकालकर सिख समुदाय के पुराने जख्मों को फिर से कुरेदा है, जिसके लिए उन्हें देश और सिख समाज से माफी मांगनी चाहिए तथा 1984 के नरसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए।
पदयात्रा में दिल्ली भाजपा के प्रदेश महामंत्री मोहनलाल गिहारा, योगिता सिंह, गुरमीत सिंह सूरा, कैलाश जैन, अमित गुप्ता, अनीश अब्बासी, चरणजीत सिंह लवली, कुलदीप सिंह, हरजिंदर सिंह सोढ़ी, सविन्दर सिंह कोहली, गुरप्रीत सिंह सरपंच, गुरमीत सिंह, कुलविंदर सिंह बंटी, इसप्रीत सिंह, कुलजीत कौर और सुमनलता डागर सहित अन्य भाजपा पदाधिकारी
एवं कार्यकर्ता शामिल हुए।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

