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दिल्ली में ‘बदरिया: ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल’ का भव्य आयोजन, कजरी और ठुमरी ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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दिल्ली में ‘बदरिया: ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल’ का भव्य आयोजन, कजरी और ठुमरी ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध


नई दिल्ली, 31 अगस्त (हि.स.)। मानसून की विदाई को एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाने के लिए आज तालकटोरा स्टेडियम में ‘बदरिया: ए मॉनसून फेयरवेल फेस्टिवल’ का भव्य आयोजन किया गया। कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली सरकार, माता चकेरी देवी फाउंडेशन तथा दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी अकादमी के सहयोग से आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में लोकसंगीत, लोकनृत्य, चित्रकला और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं की विविध झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा मंत्री कपिल मिश्रा, सांसद मनोज तिवारी सहित दिल्ली के अन्य सांसदों, विधायकों एवं अनेक अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें मंत्री कपिल मिश्रा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के उपरांत माता चकेरी देवी फाउंडेशन की ओर से स्मृति-चिह्न भी प्रदान किया गया।

फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण पद्मश्री एवं सुप्रसिद्ध लोकगायिका मालिनी अवस्थी रहीं। उन्होंने अपनी कजरी, ठुमरी और अन्य लोकधुनों की शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ अन्य कलाकारों ने भी वाद्य संगीत एवं लोक प्रस्तुतियों के माध्यम से बिहार, उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल की समृद्ध लोक परंपराओं एवं संगीत की गहराई को जीवंत किया।

‘बदरिया’ की प्रेरणा भारतीय परंपरा में मानसून के सांस्कृतिक महत्व से ली गई है। कालिदास के मेघदूत जैसे साहित्यिक ग्रंथों से लेकर लोकगीतों तक, मानसून भारतीय जीवन में खुशी, विरह, प्रेम और सृजन का प्रतीक रहा है। इसी सांस्कृतिक भावभूमि को केंद्र में रखते हुए फेस्टिवल में सावन-भादो के पारंपरिक गीतों, लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय लोकजीवन की समृद्ध परंपराओं को प्रस्तुत किया गया।

केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में राजधानी को सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। ‘बदरिया’ जैसे आयोजन इस विजन को आगे बढ़ाते हुए दिल्लीवासियों को प्रकृति, कला, संगीत और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।

हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा पिछले डेढ़ वर्ष में राजधानी के विकास और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। दिल्ली आज विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती से आगे बढ़ा रही है और ‘बदरिया’ जैसे आयोजन इस बदलती दिल्ली की सांस्कृतिक तस्वीर को दर्शाते हैं।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में पिछले वर्ष भोजपुरी, मैथिली और लोक परंपराओं को लेकर इतना बड़ा सांस्कृतिक आयोजन शुरू किया गया था। यह मुख्यमंत्री के विजन और मार्गदर्शन के कारण संभव हो पाया है। इस बार का अनुभव इस बात का प्रमाण है कि दिल्ली देश के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों की नई धुरी बन सकती है।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली में छठ, दुर्गापूजा और अन्य पारंपरिक पर्वों को भी इसी भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य दिल्ली में रहने वाले अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाई समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मान और मंच प्रदान करना है, ताकि दिल्ली की विविधता उसकी सबसे बड़ी सांस्कृतिक ताकत बने।

मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि ‘बदरिया’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकभाषा, लोकसंगीत, कला और भारतीय परंपराओं को नई पीढ़ी से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। दिल्ली सरकार राजधानी में ऐसे आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करेगी और दिल्ली को देश की प्रमुख सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाएगा।

कार्यक्रम में कलाकारों, युवा प्रतिभाओं और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्मृति-चिह्न भी प्रदान किए गए। ‘बदरिया’ ने संगीत, लोककला, साहित्य और सांस्कृतिक विविधता के माध्यम से मानसून की विदाई को एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव में बदल दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव