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दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को कैबिनेट की मंजूरी

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दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को कैबिनेट की मंजूरी


नई दिल्ली, 02 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली सरकार ने राजधानी में कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान, तेज, पारदर्शी और कम खर्चीला बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दिल्ली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस बिल, 2026 को मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि यह बिल भारत सरकार की नियमन में कमी और अनुपालन का बोझ घटाने की पहल के दूसरे चरण के तहत तैयार किया गया है। दिल्ली मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद बिल को अब भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को एक विज्ञप्ति जारी करते कहा कि इस बिल का उद्देश्य सरकार और उद्यमों के संबंधों को नियंत्रण और संदेह की व्यवस्था से निकालकर विश्वास और सुविधा पर आधारित बनाना है। प्रस्तावित कानून लागू होने के बाद सरकार और उद्यमों के बीच संबंधों में विश्वास और सुविधा को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कहा कि प्रस्तावित कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था सिंगल विंडो सिस्टम होगा। इसके अंतर्गत एक ऑनलाइन, सरल और उपयोग में आसान व्यवस्था बनाई जाएगी, जहां कारोबारी अपने कारोबार से संबंधित अनुमतियों, पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाणपत्र, सहमति, लाइसेंस आदि के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसमें भवन योजनाओं, अग्निशमन संबंधी अनुमतियों, पानी, सीवर और बिजली के कनेक्शन जैसी सेवाएं भी शामिल होंगी। इससे नागरिकों और कारोबारियों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों में जाकर अलग-अलग आवेदन जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इस सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से मिलने वाली सभी कारोबारी मंजूरियों के लिए दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) को एकल नोडल एजेंसी बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि बिल की अनुसूची-3 में शामिल कई गतिविधियों के लिए आवेदन जमा करते ही स्वीकृति, अनुमति, लाइसेंस या अनापत्ति प्रमाणपत्र देने का प्रावधान होगा। निर्धारित कम जोखिम वाली श्रेणियों और तय सीमाओं के मामलों में स्व-घोषणा स्वीकार की जाएगी। इससे कम जोखिम वाली गतिविधियों के लिए लंबी मंजूरी प्रक्रिया से राहत मिलेगी। जो गतिविधियां अनुसूची-3 में शामिल नहीं होंगी, उनके लिए मंजूरी, अनुमति, लाइसेंस और अनापत्ति प्रमाणपत्र नागरिकों को समयबद्ध व सुगम सेवा उपलब्ध कराने के अधिकार संबंधी अधिनियम, 2026 में निर्धारित समय सीमा के भीतर दिए जाएंगे। बिल में निर्धारित समय सीमा समाप्त होने पर वैधानिक रूप से मंजूरी माने जाने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारोबारियों पर दोहराव वाले पंजीकरण का बोझ भी कम किया जाएगा। जो उद्यम पहले से वस्तु एवं सेवा कर, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास अधिनियम या श्रम संहिताओं के तहत पंजीकृत हैं, उन्हें अलग से व्यापार, स्वास्थ्य-व्यापार, खान-पान गृह या दुकान एवं प्रतिष्ठान संबंधी पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी। प्रस्तावित कानून में निरीक्षण व्यवस्था को भी विश्वास पर आधारित बनाने का प्रावधान है। किसी उद्यम के पंजीकरण के बाद तीन वर्ष तक सामान्य निरीक्षण नहीं किया जाएगा। हालांकि, गंभीर प्रकृति की शिकायत मिलने पर निरीक्षण किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कारोबार करने की स्वतंत्रता बढ़ाने के लिए नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था अपनाई जाएगी। इसके अंतर्गत कोई उद्यम किसी भी स्थान पर कोई भी गतिविधि कर सकेगा, बशर्ते वह गतिविधि बिल की अनुसूची-2 में दी गई नकारात्मक सूची में शामिल न हो। इसका मूल सिद्धांत होगा कि जो प्रतिबंधित नहीं है, वह अनुमत है। यह उस व्यवस्था में बदलाव होगा जिसमें जो स्पष्ट रूप से अनुमत नहीं है, उसे प्रतिबंधित माना जाता है। सरकारी विभागों द्वारा एक ही दस्तावेज या जानकारी बार-बार मांगे जाने की समस्या को भी खत्म किया जाएगा। यदि कोई दस्तावेज या जानकारी पहले से ही दिल्ली सरकार के किसी प्राधिकरण के पास उपलब्ध है, तो उसे आवेदक से दोबारा नहीं मांगा जा सकेगा। यानी आवेदक को सरकार को अपनी जानकारी केवल एक बार देने के सिद्धांत पर व्यवस्था तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी सुधारों के माध्यम से दिल्ली में कारोबार से जुड़ी अनेक अलग-अलग, एक-दूसरे से जुड़ी हुई, विवेकाधीन और समय लेने वाली प्रक्रियाओं को एक एकीकृत, पारदर्शी, समयबद्ध और प्रौद्योगिकी आधारित व्यवस्था में बदला जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव