एमसीडी का हिन्दी-उर्दू अनुवाद विभाग बदहाली का शिकार, बंद होने की कगार पर: अंकुश नारंग
नई दिल्ली, 29 मई (हि.स.)। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) में नेता प्रतिपक्ष और आम आदमी पार्टी के नेता अंकुश नारंग ने दिल्ली सरकार पर हिन्दी और उर्दू अनुवाद विभाग की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से अनदेखी का शिकार ये विभाग अब बंद होने की कगार पर पहुंच चुके हैं।
अंकुश नारंग ने बताया कि पिछले 17 वर्षों से उर्दू अनुवादक की कोई भर्ती नहीं हुई है, जबकि हिंदी अनुवादक का स्थायी पद भी पिछले दो साल से खाली पड़ा है। उन्होंने कहा कि कभी एमसीडी के हिन्दी और उर्दू विभाग में 31 अनुवादक कार्यरत थे, लेकिन अब विभाग पूरी तरह सिमट कर रह गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि निगम सचिव कार्यालय में वर्तमान में केवल एक स्थायी उर्दू अनुवादक अफहाक हुसैन कार्यरत हैं, जो इसी वर्ष दिसंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उनके रिटायर होने के बाद उर्दू अनुवाद विभाग पूरी तरह बंद होने की स्थिति में पहुंच जाएगा। वहीं हिंदी अनुवादक का स्थायी पद भी लंबे समय से रिक्त है।
अंकुश नारंग ने कहा कि निगम सूत्रों के अनुसार वर्ष 2009 के बाद से उर्दू अनुवादक पद के लिए कोई विभागीय परीक्षा आयोजित नहीं की गई। उनके अनुसार यह दर्शाता है कि प्रशासन राजभाषा विभाग को समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में कार्यरत हिंदी अनुवादक भी कॉन्ट्रैक्ट पर हैं और उन्हें नियमानुसार वेतन तक नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि निगम सचिव कार्यालय की जिम्मेदारी होती है कि सदन की कार्यवाही और एजेंडा हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी तीनों भाषाओं में उपलब्ध कराया जाए, लेकिन विभाग में पर्याप्त स्टाफ नहीं होने से यह व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
अंकुश नारंग ने कहा कि 1960 के दशक में एमसीडी में हिन्दी और उर्दू के 31 अनुवादक हुआ करते थे, लेकिन अब पूरा विभाग लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने निगम प्रशासन से मांग की कि हिन्दी और उर्दू विभाग में रिक्त पदों पर तुरंत स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए और एमसीडी के सभी एजेंडे हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी भाषा में पेश किए जाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी

