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अभाविप का तेज हुआ चुनावी अभियान, 1973 से विद्यार्थियों के विश्वास का केंद्र

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अभाविप का तेज हुआ चुनावी अभियान, 1973 से विद्यार्थियों के विश्वास का केंद्र


नई दिल्ली, 15 सितंबर (हि.स.)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव को लेकर विभिन्न महाविद्यालयों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के प्रत्याशी एवं कार्यकर्ता विद्यार्थियों से संवाद कर उनके मुद्दों, अपेक्षाओं और विश्वविद्यालय से जुड़े विषयों पर चर्चा कर रहे हैं। अध्यक्ष पद के लिए यश डबास, उपाध्यक्ष पद के लिए ईशू मौर्य, सचिव पद के लिए रिया छाबड़ी एवं संयुक्त सचिव पद के लिए लक्ष्यराज सिंह मैदान में हैं। विद्यार्थियों के बीच अभाविप के पैनल को मिल रहे व्यापक समर्थन के साथ 7-3-3-3 मतदान क्रमांक पर अभाविप का पूरा पैनल चुनाव मैदान में हैं।

अभाविप दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि अभाविप हमेशा से विद्यार्थियों की पहली पसंद रही है। विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के लिए अभाविप ने सदैव जमीन पर काम किया है और विद्यार्थी इससे भली-भांति परिचित हैं। इसके विपरीत जमीन पर अपनी विफलता उजागर कर चुकी एनएसयूआई इस बार भी झूठ और भ्रम का सहारा ले रही है। सार्थक ने कहा कि कांग्रेस-एनएसयूआई में इस वर्ष भी वंशवाद और अवसरवाद साफ दिखाई दे रहा है, प्रमुख कांग्रेस नेता के परिजन को टिकट दिया गया, जबकि असंतुष्ट दावेदार बागी होकर मैदान में उतर गए। जब अपने ही लोगों के बीच समन्वय नहीं है, तो विद्यार्थियों की समस्याओं और आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व कैसे करेंगे? विद्यार्थी यह अंतर समझ चुके हैं और इस बार अभाविप का पूरा पैनल 4-0 की निर्णायक जीत की ओर बढ़ रहा है।

परिषद ने बताया कि वर्ष 1954 से डूसू चुनाव आयोजित होते रहे हैं और अभाविप ने 1971 से चुनाव लड़ना शुरू किया। वर्ष 1973 में पहली प्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया में अभाविप ने चारों पदों पर विजय प्राप्त की। इसके बाद अनेक चुनावों में अभाविप अध्यक्ष पद सहित अपने पैनल में बहुमत हासिल करती रही है। वर्ष 2010 से अब तक हुए 13 चुनावों में अभाविप ने 9 बार अध्यक्ष पद पर विजय प्राप्त की है। परिषद ने कहा कि यह निरंतरता बताती है कि अभाविप चुनाव के समय सक्रिय होने वाला संगठन नहीं, बल्कि सालभर कैंपस में विद्यार्थियों के बीच रहकर उनके मुद्दों पर काम करने वाला संगठन है। अभाविप वर्ष 1949 से विद्यार्थी हित में निरंतर संघर्षरत रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के लिए पीजी सीटों में लगभग दो गुना वृद्धि, यू-स्पेशल बस सेवा, केंद्रीकृत हॉस्टल आवंटन प्रक्रिया, पिंक बूथ की स्थापना, वामिका वैन एवं बुनियादी ढांचे के विकास जैसे विषयों पर अभाविप ने लगातार काम किया है। ग्रेट डूसू इंटर्नशिप के माध्यम से लगभग 7,000 तथा लॉ इंटर्नशिप के माध्यम से लगभग 1,000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया है। अभाविप ने हमेशा विद्यार्थी आंदोलनों को दलगत राजनीति से अलग रखते हुए विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता दी है।

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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी