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कबूतर मार्केट में छापेमारी, 863 पक्षी और जानवर कराए गए मुक्त, 431 संरक्षित पक्षी बरामद

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नई दिल्ली, 12 अगस्त (हि.स.)। जामा मस्जिद स्थित कबूतर मार्केट में अवैध वन्यजीव कारोबार के खिलाफ केंद्रीय जिले की पुलिस ने पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए), वर्ल्ड वाइड एनिमल और दिल्ली वन एवं वन्यजीव विभाग के साथ मिलकर संयुक्त छापेमारी की। विभिन्न पालतू जानवरों की दुकानों पर हुई कार्रवाई में कुल 863 पक्षी और जानवर बरामद/रेस्क्यू किए गए। इनमें 431 संरक्षित, प्रतिबंधित या शेड्यूल्ड पक्षी शामिल हैं। वहीं, 432 अन्य पक्षियों और जानवरों को भीड़भाड़, गंदगी और अमानवीय परिस्थितियों से मुक्त कराया गया।

पुलिस के अनुसार, नौ अगस्त पीएफए कबूतर मार्केट में संचालित कुछ पेट शॉप में संरक्षित पक्षियों और जानवरों की कथित अवैध बिक्री, कब्जे और उन्हें गैरकानूनी तरीके से रखने की सूचना मिली थी। इसके बाद पीएफए ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने वर्ल्ड वाइड एनिमल और दिल्ली के वन एवं वन्यजीव विभाग के अधिकारियों को साथ लेकर संयुक्त कार्रवाई की।

पुलिस टीम ने विभिन्न दुकानों की व्यवस्थित तरीके से जांच की। इस दौरान बड़ी संख्या में पक्षी और जानवर पिंजरों में बंद मिले। कई पिंजरे जरूरत से ज्यादा भरे हुए थे और वहां साफ-सफाई की भी उचित व्यवस्था नहीं थी। वन्यजीव विभाग और पशु कल्याण संगठनों की मदद से बरामद पक्षियों व जानवरों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग किया गया। संरक्षित पक्षियों को संबंधित वन्यजीव अधिकारियों ने जब्त किया, जबकि क्रूरता और अनुचित परिस्थितियों में रखे गए अन्य पक्षियों और जानवरों को पीएफए की देखरेख में ले जाया गया।

कार्रवाई में 72 प्लम हेडेड पैराकीट, 183 रिंग नेक पैराकीट, 63 एलेक्जेंड्राइन पैराकीट और 113 मुनिया पक्षी बरामद हुए। इनकी कुल संख्या 431 है। वर्ल्ड वाइड एनिमल ने दिल्ली वन एवं वन्यजीव विभाग के समन्वय से इन पक्षियों को जब्त किया।

इसके अलावा 148 बजरीगर, 57 कॉकटेल, 96 लव बर्ड, 18 गिनी पिग, नौ ग्रे गिलहरी, 41 सफेद चूहे, 11 खरगोश और 52 गैर-संरक्षित पैराकीट व अन्य पालतू पक्षियों को भी रेस्क्यू किया गया। इनकी कुल संख्या 432 है।

पुलिस ने बरामद पक्षियों और जानवरों के कब्जे अथवा नियंत्रण से जुड़े इकबाल खान, आकाश, कानी राम, मोहम्मद आदिल खान और राशिद खान की पहचान आरोपी के तौर पर की है। सभी कबूतर मार्केट, जामा मस्जिद के रहने वाले हैं। पांचों को कानून के तहत पाबंद किया गया है। पुलिस के मुताबिक, फिलहाल इनका कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड सत्यापित नहीं हुआ है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संरक्षित पक्षियों और अन्य जानवरों को कहां से लाया गया था। आरोपितों से इनके खरीदने, रखने, बिक्री और परिवहन के संबंध में पूछताछ की जा रही है। पुलिस सप्लायर, ट्रांसपोर्टर, बिक्री और वितरण में शामिल लोगों तथा इन पक्षियों के संभावित गंतव्य का पता लगाने का प्रयास कर रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी