बजट सत्र के दौरान सीएजी की कई रिपोर्ट पर चर्चा, ‘शीश महल’ को लेकर गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख : विजेंद्र गुप्ता
नई दिल्ली, 27 मार्च (हि.स.)। दिल्ली विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को सदन में पेश कई सीएजी रिपोर्टों पर चर्चा हुई। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बजट सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आज सदन में सीएजी की उन विभिन्न रिपोर्टों पर चर्चा हुई जो 23 मार्च को सदन के पटल पर रखी गई थीं। 25 मार्च को सदस्यों ने सीएजी की रिपोर्ट संख्या 5, वर्ष 2024 पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसमें शीश महल से संबंधित निष्कर्ष सम्मिलित थे। इसके अतिरिक्त सीएजी ने उसी रिपोर्ट में जीएसजी, वैट, स्टाम्प शुल्क, पंजीकरण शुल्क, मोटर वाहन कर और आबकारी की उगाही में गंभीर अनियमितताओं का भी उल्लेख किया है। सूचना एवं प्रचार निदेशालय, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास तथा राजस्व विभाग के कामकाज में कमियों भी उक्त रिपोर्ट में इंगित की गई हैं।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि आज सदन में उन अन्य रिपोर्टों पर चर्चा हुई जो 23 मार्च को सदन के पटल पर रखी गई थीं। इसमें रिपोर्ट संख्या 3, वर्ष 2022 में सीएजी ने गृह, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण, शहरी विकास, समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास, पर्यटन, यूटीसीएस, एनएसयूटी आदि विभागों में अनियमितताओं और कमियों को उजागर किया है। रिपोर्ट संख्या 1, वर्ष 2023 में सीएजी ने देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों पर निष्पादन लेखापरीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत की है। यह रिपोर्ट वर्ष 2018-19 से 2020-21 तक की तीन वर्षों की अवधि को समाहित करती है। लेखापरीक्षा में महिला एवं बाल विकास विभाग (डीडब्लूडी), दिल्ली राज्य बाल संरक्षण समिति (डीएससीपीएस), राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन अभिकरण (एसएआरए), बाल कल्याण समितियों (सीडब्लूसी), जिला बाल संरक्षण इकाइयों (डीसीपीयू) तथा बाल देखभाल संस्थाओं (सीसीआई) के अभिलेखों की परीक्षण-जांच की गई।
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि इस रिपोर्ट में देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए सरकार के प्रयासों में कई कमियां उजागर हुई हैं– विशेष रूप से इस योजना के लिए संस्थाओं की निधि जारी करने में विलंब तथा बाल देखभाल संस्थाओं को दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित करने जैसे बाल कल्याण उपायों में देरी। बाल देखभाल संस्थाओं में कर्मचारियों की कमी, अपर्याप्त भौतिक अधोसंरचना और अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति पाई गई। सरकार ने पालन योजना को भी लागू नहीं किया, जो देखभाल आवश्यक बच्चों के माता-पिता को वित्तीय सहायता प्रदान करने तथा व्यक्तियों को ऐसे बच्चों का पालक बनने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से बनाई गई थी।
विश्वविद्यालयों के कामकाज पर सीएजी रिपोर्ट (रिपोर्ट संख्या 4, वर्ष 2025) में अप्रैल 2018 से मार्च 2023 की अवधि को आच्छादित करते हुए गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और दिल्ली फार्मास्यूटिकल साइंसेज एवं रिसर्च विश्वविद्यालय के विस्तृत लेखापरीक्षा संबंधी निष्कर्ष सम्मिलित हैं। सीएजी ने शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मामलों, विश्वविद्यालयों की मान्यता एवं संबद्धता प्रक्रिया, मानव संसाधन प्रबंधन, अधोसंरचना सुविधाओं, वित्तीय प्रबंधन तथा आंतरिक नियंत्रण में कई विसंगतियों को उजागर किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

