तेलंगाना के वारंगल में 800 साल पुराने काकतीय मंदिर को ध्वस्त करने पर मामला दर्ज
हैदराबाद, 08 मई (हि.स.)। तेलंगाना के वारंगल जिले में एक यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल के निर्माण के लिए 800 साल पुराने काकतीय कालीन शिव मंदिर को बुलडोजर से ढहा दिया गया, जिससे आक्रोश और कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। खानपुर मंडल के अशोक नगर में हुई इस घटना पर राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएचए) में शिकायत के बाद केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और पुरातत्व विभाग ने मामला दर्ज कर लिया है।
वकील इम्मनेनी रामा राव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि काकतीय शासक गणपति देव (1199-1262 ईस्वी) के शासनकाल के इस शिव मंदिर को खानापुर मंडल में 'यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल' के निर्माण के लिए भारी मशीनों से नष्ट कर दिया गया। शिकायत में कहा गया कि अधिकारियों ने 'तेलंगाना हेरिटेज एक्ट' के तहत अनिवार्य 'विरासत संरक्षण समिति' का गठन नहीं किया। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि मंदिर को ध्वस्त करने के बजाय उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता था।
रिपोर्टों के अनुसार मंदिर के गर्भगृह को खोदा गया था, जिससे यह संदेह पैदा हो गया है कि ठेकेदार ने नीचे दबे कथित खजाने की तलाश में इसे नष्ट किया होगा। हालांकि जिला प्रशासन ने इन आरोपों का खंडन किय। वारंगल जिला कलेक्टर कार्यालय के अनुसार छह मई को किए गए संयुक्त निरीक्षण में पाया गया कि जमीन पर भारी झाड़ियां और पेड़ उगे हुए थे।
प्रशासन का दावा है कि 30 एकड़ भूमि पर घनी वनस्पतियों की सफाई के दौरान केवल एक पुरानी जीर्ण-शीर्ण संरचना के अवशेष मिले थे। ठेकेदार ने किसी भी निर्माण को जानबूझकर नहीं तोड़ा। पुरातत्व विभाग ने पुष्टि की है कि यह संरचना 'संरक्षित स्मारकों' की आधिकारिक सूची में शामिल नहीं थी।
वारंगल कलेक्टर डॉ. सत्य शारदा और नरसंपेट विधायक दोंथी माधव रेड्डी ने स्थल का दौरा किया और जनता को आश्वासन दिया कि मंदिर का उसी स्थान पर पुनर्निर्माण किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि बहाली का कार्य इतिहासकारों, पारंपरिक मंदिर वास्तुकारों (स्थपति) और पुरातत्व विभाग के परामर्श से किया जाएगा। प्रशासन ने भविष्य में इस स्थल को औपचारिक रूप से संरक्षित करने के लिए कदम उठाने का भी वादा किया। उल्लेखनीय है कि तेलंगाना के वारंगल जिले में खानपुर मंडल एक प्रशासनिक क्षेत्र है, जो नरसंपेट राजस्व प्रभाग के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र के पहाला अशोकनगर गांव में 13वीं सदी (लगभग 800 वर्ष पुराना) का काकतीय-युग का शिव मंदिर स्थित था। यह मंदिर 13वीं शताब्दी के मिट्टी के किले के भीतर स्थित था, जिसे सरकारी एकीकृत स्कूल के निर्माण के लिए 2026 में तोड़े जाने के बाद भारी विवाद के चलते पुनः निर्मित करने का निर्णय लिया गया है। कोट्टा तेलंगाना चरित्रा ब्रुंदम' के संयोजक एस. हरगोपाल के अनुसार मंदिर में ऐसे पत्थर के शिलालेख थे जिनमें गणपति देव को महाराजू (राजाओं का राजा) कहा गया था।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj

