राज्यसभा में खुलासा : 2021 से 'नैक' की मान्यता के बगैर चल रहे बंगाल के तीन विश्वविद्यालय
कोलकात, 19 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की मान्यता को लेकर पश्चिम बंगाल के उच्च शिक्षण संस्थानों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बुधवार को राज्यसभा में सरकार की ओर से दिए गए एक लिखित उत्तर के अनुसार, राज्य के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों - रवींद्र भारती विश्वविद्यालय, गौर बंग विश्वविद्यालय और कल्याणी विश्वविद्यालय की नैक मान्यता की अवधि समाप्त हो चुकी है।
पश्चिम बंगाल से सांसद और केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने बताया कि इन विश्वविद्यालयों की मान्यता वर्ष 2021 में समाप्त हो गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इन संस्थानों ने अब तक पुनः मान्यता (री-एक्रेडिटेशन) के लिए आवेदन भी नहीं किया है।
सरकार के अनुसार, नैक मान्यता उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता, स्वायत्तता का दर्जा और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं इससे जुड़ी होती हैं।
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि (यूजीसी) केवल उन्हीं संस्थानों को अनुदान देता है जो यूजीसी अधिनियम की धारा 12बी के तहत मान्यता प्राप्त हैं, और इसके लिए नैक मान्यता अनिवार्य है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, राज्य के प्रमुख विश्वविद्यालयों का इस तरह नैक मान्यता खो देना उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय

