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सारधा चिटफंड प्रमुख सुदीप्त सेन 13 वर्ष बाद निकलेंगे जेल से बाहर, सभी मामलों में मिली जमानत

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सारधा चिटफंड प्रमुख सुदीप्त सेन 13 वर्ष बाद निकलेंगे जेल से बाहर, सभी मामलों में मिली जमानत


कोलकाता, 08 अप्रैल (हि.स.)। पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित सारधा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपित सुदीप्त सेन को सभी लंबित मामलों में जमानत मिल गई है और लगभग 12 वर्ष और 11 माह जेल में रहने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। फिलहाल वह कोलकाता के प्रेसिडेंसी जेल में बंद हैं और संभावना है कि वह गुरुवार को रिहा हो सकते हैं।

कलकत्ता उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने बुधवार को राज्य पुलिस के अधीन दो मामलों में भी उन्हें जमानत दे दी। इसके साथ ही उनके जेल से बाहर आने में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है। हालांकि, अदालत ने जमानत के साथ कुछ शर्तें भी लगाई हैं।

बताया गया है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पास कुल 76 मामले थे, जिनमें सुदीप्त सेन को पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इसके अलावा बारासात थाने के दो मामलों में वह अब तक जेल में थे और इन्हीं मामलों में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई संभव हो पाई है।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सारधा समूह के खिलाफ कुल 389 मामले दर्ज हुए थे। सुदीप्त सेन को 27 अप्रैल, 2013 को बिधाननगर थाने में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में केंद्रीय एजेंसी ने 76 मामलों की जांच अपने हाथ में ली और कई मामलों में आरोपपत्र दाखिल किया गया। शेष मामलों में राज्य पुलिस ने कार्रवाई की।

बताया गया कि केंद्रीय एजेंसियों के मामलों में जमानत मिलने के बावजूद राज्य पुलिस के अधीन 308 मामलों में से दो मामलों के कारण उनकी रिहाई अटकी हुई थी। बुधवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई के बाद उन मामलों में भी जमानत दे दी गई।

इस बीच तृणमूल कांग्रेस के नेता और बेलियाघाटा सीट से उम्मीदवार कुणाल घोष ने कहा कि किसी को जमानत मिलना या नहीं मिलना पूरी तरह अदालत का विषय है और यह कानून की प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सुदीप्त सेन ने जमानत की अर्जी दी थी और अदालत ने उसे मंजूर किया है, इसलिए इस पर अलग से टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है।

उल्लेखनीय है कि, वर्ष 2013 में सारधा घोटाला सामने आने के बाद सुदीप्त सेन अपनी सहयोगी देवयानी मुखर्जी के साथ कश्मीर के सोनमर्ग में छिप गए थे। उसी वर्ष उन्हें वहां से गिरफ्तार किया गया था। तब से दोनों जेल में थे, हालांकि 2023 में देवयानी मुखर्जी को कुछ घंटों के लिए पैरोल मिली थी।

सारधा निवेश योजना के खिलाफ राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हुई थीं। बाद में सीबीआई ने भी जांच शुरू की। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने भी सुदीप्त सेन के खिलाफ मामले दर्ज किए थे।-----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर