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तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाला

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तृणमूल कांग्रेस ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निकाला


कोलकाता, 01 जून (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अपने दो विधायकों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित कर दिया है। इन विधायकों के नाम संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी हैं। तृणमूल ने दोनों पर पार्टी-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए यह कार्रवाई की है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, निष्कासन की जानकारी दोनों नेताओं को ईमेल और व्हाट्सऐप के माध्यम से सूचित कर दी गई है। साथ ही इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु को भी जानकारी दे दी गई है।

सोमवार को अलग-अलग जारी निष्कासन नोटिस में तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि दोनों विधायक पार्टी के अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों में बार-बार अनुपस्थित रहे और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।

नोटिस में आगे कहा गया है कि यह भी देखा गया है कि दोनों विधायकों ने ऐसी गतिविधियों में भाग लिया है और ऐसे बयान दिए हैं जो पार्टी के हितों के लिए हानिकारक हैं। इस मामले पर उचित विचार-विमर्श के बाद दोनों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित करने का निर्णय लिया है।

निष्कासन के बाद संदीपन साहा ने पार्टी के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जो लोग अनैतिक कार्य करते हैं, पार्टी उनका समर्थन करती है, जबकि नैतिक कदम उठाने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उपस्थिति रजिस्टर में किए गए हस्ताक्षर को किसी प्रस्ताव पर समर्थन के हस्ताक्षर के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस घटनाक्रम से पहले एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुलासा करते हुए कहा था कि संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने ही विधानसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उनके हस्ताक्षरों की जालसाजी की गई है।मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस मंत्री के रूप में मामला उनके संज्ञान में आने के बाद उन्होंने जांच में सीआईडी को शामिल करने का निर्देश दिया था।

यह पूरा मामला विधानसभा में विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक की नियुक्ति से जुड़े कथित हस्ताक्षर विवाद से संबंधित है। विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 06 मई को ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई थी। बैठक में विधायकों ने प्रस्ताव पारित कर विपक्ष के नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक के चयन का अधिकार पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया था।

इसके बाद तृणमूल कांग्रेस की ओर से शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता, नयना बंद्योपाध्याय और असीमा पात्र को उपनेता तथा फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक नियुक्त किए जाने की जानकारी दी गई। इस संबंध में पार्टी की ओर से अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षरयुक्त एक पत्र विधानसभा को भेजा गया था। यह विवाद तब गहराया जब कुछ विधायकों के हस्ताक्षरों में कथित तौर पर विसंगति और असंगति सामने आई।

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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर