व्यापार और तकनीक से पश्चिम बंगाल में औद्योगिक क्रांति की संभावनाएं प्रबल : जितिन प्रसाद
कोलकाता, 29 सितंबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल अपने औद्योगिक सपनों को साकार करने के एक बेहद निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। 'व्यापार' और 'तकनीक' आर्थिक विकास के वे दो इंजन हैं, जो इस राज्य को औद्योगीकरण की एक नई ऊंचाई पर ले जाने में सक्षम हैं। यह बातें केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने मंगलवार को कलकत्ता चैंबर ऑफ कॉमर्स की 195वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) को संबोधित करते हुए कहा।
केंद्रीय मंत्री ने भारत के बढ़ते वैश्विक व्यापारिक प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत द्वारा हाल ही में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) ने घरेलू उद्यमों के लिए विकसित दुनिया के 65-75 प्रतिशत बाजारों में 'ड्यूटी-फ्री' पहुंच खोल दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पश्चिम बंगाल के व्यापारिक समुदाय के लिए एक अभूतपूर्व अवसर है।
उन्हाेंने कहा कि व्यापार और प्रौद्योगिकी भारत की विकास गाथा को नई गति दे रहे हैं। जहां विकसित देश तकनीकी विशेषज्ञता लेकर आते हैं, वहीं भारत उन्हें अद्वितीय पैमाना, विशाल बाजार और उत्कृष्ट प्रतिभा प्रदान करता है। वैश्विक निवेशकों से अपील की कि वे भारत को केवल एक 'उपभोक्ता बाजार' के रूप में देखने के बजाय, भारतीय स्टार्टअप्स और घरेलू उद्योगों के साथ सीधे सहयोग करें और संयुक्त उद्यम स्थापित करें।
पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए प्रसाद ने कहा कि राज्य के पास एक क्षेत्रीय 'लॉजिस्टिक हब' (रसद केंद्र) के रूप में अपार रणनीतिक लाभ मौजूद हैं। बंगाल के पास बेहतर बंदरगाह संपर्क (पोर्ट कनेक्टिविटी) के साथ-साथ इस्पात, कपड़ा, रसायन और विनिर्माण जैसे स्थापित क्षेत्र हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार, राज्य की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, बंगाल में आधुनिक और 'प्लग-एंड-प्ले' (तत्काल उपयोग के लिए तैयार) औद्योगिक बुनियादी ढांचा स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। उनका दावा था कि इन पहलों से राज्य में व्यापारिक बाधाएं दूर होंगी और बंगाल के औद्योगिक 'स्वर्ण युग' की वापसी हो सकेगी।
व्यापार को आसान बनाने के लिए किए जा रहे विनियामक सुधारों का जिक्र करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार नौकरशाही की लालफीताशाही को खत्म कर रही है। इसके लिए डिजिटल क्लीयरेंस, वाणिज्य मंत्रालय के कार्यालयों को सिंगल-विंडो सिस्टम के तहत लाना और जिला स्तर पर निर्यात प्रोत्साहन हब जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 'जन विश्वास' ढांचे के तहत छोटे तकनीकी अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर (डीक्रिमिनलाइज) किया जा रहा है, ताकि उद्योग जगत में डर के बजाय 'भरोसे' का माहौल बन सके।
हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में बंगाल की क्षमता को रेखांकित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य का कुशल कार्यबल विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र के लिए अत्यधिक अनुकूल है। नई और उभरती प्रौद्योगिकियों पर बात करते हुए उन्होंने उद्योगों से एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग सिर्फ सामान्य ऑनलाइन सर्च तक सीमित न रखकर, व्यावहारिक आर्थिक प्रभाव पैदा करने में करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई को इस तरह अपनाया जाना चाहिए जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की उत्पादन लागत कम हो सके और किसानों को सीधा लाभ मिले।
अपने संबोधन के अंत में, प्रसाद ने देश के 1,600 से अधिक वाणिज्य मंडलों (चैंबर्स ऑफ कॉमर्स) से आह्वान किया कि वे जमीनी स्तर के उद्योगों और नीति निर्माताओं के बीच एक मजबूत सेतु का काम करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में दीर्घकालिक और नीति-आधारित औद्योगिक बदलाव लाने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है।----------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

