home page

स्वतंत्रता सेनानी परिवार के वंशज शुभेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति के नए 'शहंशाह'

 | 
स्वतंत्रता सेनानी परिवार के वंशज शुभेंदु अधिकारी बंगाल की राजनीति के नए 'शहंशाह'


कोलकाता, 09 मई (हि.स.)। शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। जनसेवा को समर्पित उनका सार्वजनिक जीवन तीन दशकों से अधिक का रहा है। सामाजिक कार्यों के प्रति समर्पण के कारण उन्होंने अविवाहित रहने का निर्णय लिया। विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने नंदीग्राम की अपनी पारंपरिक सीट जितने के साथ ही भवानीपुर से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को करारी शिकस्त देकर बंगाल की राजनीति में नये शहंशाह बन कर उभरे हैं।

पूर्वी मेदिनीपुर के करकुली में 15 दिसंबर, 1970 को जन्मे शुभेंदु अधिकारी ने रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (एमए) की शिक्षा प्राप्त की है। वे कांथी के प्रतिष्ठित अधिकारी परिवार से आते हैं, जिसका स्वतंत्रता आंदोलन में भी उल्लेखनीय योगदान रहा है। उनके पूर्वज बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी प्रखर राष्ट्रवादी थे, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में भाग लिया था। बताया जाता है कि उस दौर में बिपिन अधिकारी को कारावास भी झेलना पड़ा और उनके पैतृक घर को अंग्रेजों ने दो बार आग के हवाले किया था।

शुभेंदु अधिकारी का विधायी और प्रशासनिक अनुभव भी काफी व्यापक रहा है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक और विधानसभा में पांच वर्षों तक नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। स्थानीय प्रशासन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है, जिसमें कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष के रूप में कार्य शामिल है।

उन्होंने राज्य सरकार में परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री के रूप में भी कार्य किया है। इसके अलावा वे हुगली रिवर ब्रिज कमीशन और हल्दिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर रहते हुए औद्योगिक विकास में योगदान दे चुके हैं। सहकारिता क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। वे कांथी अर्बन कोऑपरेटिव, एग्रीकल्चर रूरल बैंक और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष रह चुके हैं।

वर्ष 2000 में वे ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे। इसके बाद नंदीग्राम आंदोलन के दौरान वे ममता बनर्जी के साथ प्रमुख चेहरा बनकर उभरे। 2009 में वे तमलुक से सांसद बने और 2016 में नंदीग्राम से विधायक चुने गए। लंबे समय तक ममता बनर्जी के भरोसेमंद रहे शभेंदु ने वर्ष 2020 में तृणमूल नेतृत्व के साथ मतभेदों के चलते भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा।

2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम से ममता बनर्जी को हराकर राजनीतिक हलकों में बड़ा संदेश दिया। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु ने न सिर्फ नंदीग्राम की अपनी सीट बचाये रखी बल्कि भवानीपुर से ममता बनर्जी को करारी शिकस्त देकर बंगाल की राजनीति के नये शहंशाह बन कर उभरे। पार्टी ने चुनाव में उनकी दोहरी उपलब्धि, लंबे प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें बंगाल की कमान सौंपी है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता