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बंगाल : बैरकपुर जूट अनुसंधान संस्थान पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान

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बंगाल : बैरकपुर जूट अनुसंधान संस्थान पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान


बंगाल : बैरकपुर जूट अनुसंधान संस्थान पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान


बंगाल : बैरकपुर जूट अनुसंधान संस्थान पहुंचे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान


कोलकाता, 15 जुलाई (हि. स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को बैरकपुर स्थित केंद्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान केंद्र (सीआरआईजेएएफ) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संस्थान में चल रहे विभिन्न अनुसंधान कार्यों का निरीक्षण किया तथा जूट और संबद्ध रेशों की खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने वाली कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

इस अवसर पर पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दूध कुमार मंडल, कर्नल चक्रवर्ती, संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों और किसानों के साथ विस्तृत संवाद कर जूट की उन्नत किस्मों, उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और किसानों की आय में वृद्धि के उपायों पर चर्चा की।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जूट एक पर्यावरण अनुकूल फसल है और भविष्य में प्लास्टिक के बेहतर विकल्प के रूप में इसकी मांग तेजी से बढ़ेगी। उन्होंने बैरकपुर स्थित जूट अनुसंधान संस्थान को जूट क्रांति का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार आधुनिक तकनीक किसानों तक पहुंचाने और उन्हें बेहतर उत्पादन व उचित मूल्य दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि पहले जूट का औसत उत्पादन लगभग 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर था, जिसे अनुसंधान और नई तकनीकों के माध्यम से बढ़ाकर 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है। अब सरकार का लक्ष्य इसे और बढ़ाना है।

केंद्रीय मंत्री ने जूट बीज उत्पादन पर भी विशेष जोर देते हुए कहा कि अब तक जूट के बीज बाहर से मंगाने पड़ते थे, लेकिन सरकार ने देश में ही गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन का अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। जूट के साथ-साथ मक्का, आलू और अन्य फसलों के उन्नत बीजों के स्वदेशी उत्पादन पर भी काम किया जाएगा।

उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा बंद पड़ी जूट मिलों को दोबारा चालू करने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे किसानों को बाजार मिलेगा और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने संस्थान द्वारा स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि जूट क्षेत्र की हर समस्या का समाधान करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है और जल्द ही जूट उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक व्यापक मंथन आयोजित किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश में लगभग 40 लाख किसान जूट की खेती से जुड़े हैं, जबकि जूट उद्योग के माध्यम से करीब चार लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि जूट अनुसंधान संस्थान का उद्देश्य नई किस्मों का विकास, उत्पादन लागत में कमी, उत्पादकता में वृद्धि और जूट के अलावा अन्य प्राकृतिक रेशों पर भी अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जूट की कीमतों में उतार-चढ़ाव किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। हालांकि इस वर्ष किसानों को जूट का अच्छा मूल्य मिल रहा है। सरकार भविष्य में भी किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने और जूट उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा