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बंगाल में विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिलने पर विधानसभा में स्पीकर कक्ष के बाहर धरने पर बैठे तृणमूल विधायक

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बंगाल में विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिलने पर विधानसभा में स्पीकर कक्ष के बाहर धरने पर बैठे तृणमूल विधायक


कोलकाता, 27 मई (हि.स.)। तृणमूल कांग्रेस ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि विधानसभा सचिवालय ने अब तक शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता का आधिकारिक दर्जा नहीं दिया है।

इस मुद्दे पर शिकायत दर्ज कराने पहुंचे कुणाल घोष और शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने स्पीकर से मुलाकात नहीं होने पर उनके कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। तृणमूल नेताओं का कहना है कि 18वीं विधानसभा के गठन और पहले सत्र के संपन्न होने के बावजूद विपक्ष के नेता को न तो औपचारिक मान्यता मिली है और न ही उनके लिए निर्धारित कक्ष आवंटित किया गया है।

बुधवार शाम बालीगंज विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय और बेलियाघाटा विधायक कुणाल घोष विधानसभा भवन में स्पीकर रथीनाथ बसु से मुलाकात करने पहुंचे थे। हालांकि, उनका दावा है कि स्पीकर ने मिलने का समय नहीं दिया। इसके बाद दोनों नेता स्पीकर कक्ष के बाहर बैठ गए और विधानसभा सचिवालय के रवैये पर नाराजगी जताई।

कुणाल घोष ने विधानसभा के एक अधिकारी से नाराजगी जताते हुए कहा कि शोभनदेव चट्टोपाध्याय विपक्ष के नेता हैं। 36 वर्षों से विधायक हैं। फिर भी उन्हें कमरा नहीं दिया जा रहा। उनके पत्र की प्राप्ति रसीद तक नहीं दी जा रही है। सचिवालय की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा। संसदीय दल की बैठक तक नहीं हो पा रही है।

तृणमूल नेताओं ने सवाल उठाया कि जब स्पीकर और मुख्यमंत्री के कक्ष तैयार हो चुके हैं, तब विपक्ष के नेता के लिए कमरा अब तक क्यों तैयार नहीं किया गया। कुणाल घोष ने इसे संसदीय शिष्टाचार का मामला बताते हुए स्पीकर से मुलाकात नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।

तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि 13 मई को पार्टी की ओर से स्पीकर को पत्र भेजकर 80 विधायकों के समर्थन के साथ शोभनदेव चट्टोपाध्याय को संसदीय दल का नेता घोषित किए जाने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद उन्हें अब तक विपक्ष के नेता का दर्जा नहीं मिला है।

उल्लेखनीय है कि, 294 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी दल का दर्जा पाने के लिए कम से कम 30 विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है।----------------------

हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर