बंगाल में अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों काे लेकर ममता ने जताई आपत्ति
कोलकाता, 19 मार्च (हि.स.)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य में अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के एकतरफा फैसले प्रशासनिक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि चुनाव से ठीक पहले मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को बिना ठोस कारण हटाया गया है। उनके अनुसार, इस तरह के फैसलों से राज्य के प्रशासनिक कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से बिना परामर्श किए कई जिला निर्वाचन अधिकारियों का तबादला किया और 15 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अन्य चुनावी राज्यों में पर्यवेक्षक के रूप में तैनात कर दिया। मुख्यमंत्री के मुताबिक यह स्थापित प्रक्रिया के खिलाफ है।
मुख्यमंत्री ने लिखा कि मार्च और अप्रैल के महीनों में पश्चिम बंगाल में अक्सर आंधी-तूफान (नॉरवेस्टर) आते हैं, जिनसे जान-माल का नुकसान होता है। ऐसे समय में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों में महत्वपूर्ण होती है। अचानक तबादलों से आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि बाहरी अधिकारियों को स्थानीय भाषा, भूगोल और सामाजिक परिस्थितियों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती, जिससे कानून-व्यवस्था संभालने में कठिनाई हो सकती है। ऐसी किसी भी स्थिति की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की होगी।
मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग से अपील की कि वह इस तरह के “मनमाने और पक्षपातपूर्ण” कदमों से बचे और सहकारी संघवाद की भावना का सम्मान करे।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान भी राज्य की निर्वाचित सरकार काम करती रहती है और उसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने इस मामले में पुनर्विचार की मांग करते हुए लोकतांत्रिक परंपराओं की रक्षा पर जोर दिया।--------------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

