पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में, मतदान 23 व 29 अप्रैल को
कोलकाता, 15 मार्च (हि.स.)। भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान होगा। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना चार मई को की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया छह मई तक पूरी कर ली जाएगी।
चुनाव कार्यक्रम घोषित होते ही पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जो चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सरकार नई योजनाओं की घोषणा, प्रशासनिक तबादलों और राजनीतिक प्रचार से जुड़े कई नियमों का पालन करेगी ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किया जा सके।
निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान कराया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में शेष 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
पहला चरण (152 सीटें)
अधिसूचना जारी होने की तिथि: 30 मार्च, 2026 नामांकन की अंतिम तिथि: 6 अप्रैल, 2026नामांकन पत्रों की जांच: 7 अप्रैल, 2026नाम वापसी की अंतिम तिथि: 9 अप्रैल, 2026मतदान: 23 अप्रैल, 2026मतगणना: 4 मई, 2026चुनाव प्रक्रिया समाप्ति: 6 मई 2026
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दूसरा चरण (142 सीटें)
अधिसूचना: 2 अप्रैल 2026नामांकन की अंतिम तिथि: 9 अप्रैल 2026जांच: 10 अप्रैल 2026नाम वापसी: 13 अप्रैल 2026मतदान: 29 अप्रैल 2026मतगणना: 4 मई 2026प्रक्रिया समाप्ति: 6 मई 2026---------
पश्चिम बंगाल में पिछली बार 2021 का विधानसभा चुनाव रिकॉर्ड आठ चरणों में हुआ था, जिसमें कई जगह हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। इससे पहले 2016 और 2011 में छह चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2006 में पांच चरणों में चुनाव कराए गए थे। 2001 के बाद से राज्य में एक ही दिन मतदान नहीं हुआ है।
इन सभी चुनावों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी और इस बार भी सुरक्षा को लेकर व्यापक तैयारी की जा रही है।
चुनाव कार्यक्रम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि वह वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया का विरोध कर घुसपैठियों को लाभ पहुंचाना चाहती है।
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर धार्मिक ध्रुवीकरण का आरोप लगाया है। इससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि चुनावी मुकाबला काफी तीखा होने वाला है।
प्रधानमंत्री की कोलकाता रैली से कुछ समय पहले ही सभा स्थल से करीब 5 किलोमीटर दूर भाजपा और तृणमूल समर्थकों के बीच झड़प की घटना भी सामने आई थी, जिसमें पथराव और नारेबाजी हुई।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस 2011 से सत्ता में है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी ने 34 साल पुराने वाम मोर्चा शासन को समाप्त किया था। 2011 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस काे 184 सीटें, कांग्रेस काे 42 सीटें, वाम दल काे 40 सीटें मिली थीं। इसके बाद भाजपा ने राज्य में धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की।
इसके बाद 2016 के चुनाव में भाजपा काे 3 सीट तथा 2021 में भाजपा काे 77 सीटें मिली थीं। वहीं, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटें जीती थीं, जो बाद में उपचुनाव जीतकर 215 हो गईं।
2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 42 में से 18 सीटें जीती थीं। हालांकि, 2024 में यह संख्या घटकर 12 रह गई।
चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर भी विवाद जारी है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि लगभग 63 लाख नाम हटाए गए हैं और करीब 60 लाख मतदाताओं को विवादाधीन श्रेणी में रखा गया है। इसी मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 6 मार्च को कोलकाता के एस्प्लेनेड क्षेत्र में धरना भी दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने 24 फरवरी को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का उपयोग करते हुए निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया था कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद भी पूरक सूची प्रकाशित की जाए ताकि कोई भी पात्र मतदाता मतदान से वंचित न रहे।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि लंबित दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। इसके लिए 250 से अधिक वर्तमान और सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों को लगाया गया, जिन्होंने लगभग 50 लाख दावों और आपत्तियों पर काम किया।
निर्वाचन आयोग की टीम जब कोलकाता में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए पहुंची तो तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे और पोस्टर दिखाकर विरोध दर्ज कराया।
तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर केंद्रीय एजेंसियों और निर्वाचन आयोग के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। चुनाव से काफी पहले राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती हो गई है और चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी मतदान केदो पर सेंट्रल फोर्स तैनात रहेंगे तथा 100 प्रतिशत वेब कास्टिंग होगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस सत्ता बचाने के लिए पूरी ताकत लगाएगी, जबकि भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में है। वाम दल और कांग्रेस भी अपनी जमीन वापस पाने की कोशिश में हैं।
ऐसे में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

