बालगोकुलम संस्कृति और चरित्र का संगम, युवाओं को दिशा देने वाला मंच: उपराष्ट्रपति
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि बालगोकुलम जैसे संगठन संस्कृति और चरित्र का संगम हैं, जो बच्चों को उनकी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन शनिवार को बालगोकुलम दिल्ली-एनसीआर के रजत जयंती समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम त्यागराज स्टेडियम में आयोजित किया गया।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में बच्चों के सामने कई प्रकार के आकर्षण और मूल्यगत दुविधाएं हैं। ऐसे समय में बालगोकुलम जैसे संस्थान मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने “विकास भी, विरासत भी” को युवाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बताते हुए कहा कि आधुनिक आकांक्षाओं और सांस्कृतिक गौरव के बीच संतुलन आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने ‘अमृत काल’ की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को जिम्मेदार और मूल्य-आधारित नागरिकों की जरूरत है, जो राष्ट्र को समृद्ध भविष्य की ओर ले जा सकें।
बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें संगठन की विरासत का सच्चा वाहक बताया और सम्मान, संस्कृति प्रेम, टीमवर्क और आत्मअनुशासन जैसे मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने ‘कृष्णार्पणम्’ की अवधारणा को भी रेखांकित करते हुए कहा कि अपने विचारों, कर्मों और प्रतिभा को उच्च उद्देश्य के लिए समर्पित करना भगवान कृष्ण के उपदेशों का सार है।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्रीपद नाइक, जॉर्ज कुरियन और बालगोकुलम दिल्ली-एनसीआर के अध्यक्ष पी. के. सुरेश सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार

