विकसित भारत का लक्ष्य महिलाओं के सशक्तिकरण से संभवः विजया रहाटकर
नई दिल्ली, 01 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य महिलाओं के सशक्तिकरण और नेतृत्व से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं न केवल आर्थिक और सामाजिक विकास की महत्वपूर्ण वाहक हैं बल्कि वे देश के सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक भी हैं।
विजया रहाटकर शनिवार को दिल्ली प्रांत द्वारा विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के सप्त शक्ति नारी सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के सभागार में आयोजित इस सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बढ़ते व्यक्तिवाद, परिवार संस्था के कमजोर होने और मूल्य क्षरण जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। उन्होंने महिला आयोग के “तेरे मेरे सपने” जैसे कार्यक्रमों का उल्लेख किया, जो विवाह पूर्व संवाद को बढ़ावा देने और पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।
विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद इग्नू की कुलपति प्रो. उमा कांजिलाल ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों—शिक्षा शक्ति, आर्थिक शक्ति, डिजिटल शक्ति, स्वास्थ्य शक्ति, नेतृत्व शक्ति और सांस्कृतिक शक्ति—को समग्र विकास के स्तंभ के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने यह भी कहा कि जहां महिलाएं देश की लगभग 48 प्रतिशत जनसंख्या का हिस्सा हैं, वहीं केवल 34 प्रतिशत महिलाएं ही कार्यबल में शामिल हैं। इस अंतर को शिक्षा, नेतृत्व और उद्यमिता के माध्यम से दूर करना आवश्यक है।
समापन सत्र में सांसद बांसुरी स्वराज ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में विकास के लिए इस प्रकार के मंच अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि नीतिगत एवं संस्थागत ढांचे को सुदृढ़ करना समय की आवश्यकता है।
देशभर से प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, सामाजिक चिंतकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। “सशक्त महिलाएं, विकसित भारत के लिए” विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन ने एक विकसित, समावेशी एवं सांस्कृतिक रूप से सुदृढ़ भारत के निर्माण में महिलाओं की परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया।
यह सम्मेलन सप्तशक्ति (सप्तशक्ति) की अवधारणा पर आधारित था, जो स्त्रीत्व के सात मूल गुणों—श्री (समृद्धि), वाक् (वाणी), कीर्ति (यश), स्मृति (स्मरण शक्ति), मेधा (बुद्धि), क्षमा (क्षमाशीलता) और धृति (धैर्य) को अभिव्यक्त करता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

