(अपडेट) केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है सनातन: योगी आदित्यनाथ
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित सोमनाथ संकल्प महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री
वाराणसी, 11 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साेमवार काे कहा कि 1000 वर्ष पूर्व विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी सहित अन्य विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर 17 बार आक्रमण कर उसके वैभव को खंडित करने का प्रयास किया था। क्योकि उन्हें यह भ्रम था कि मूर्तियों को खंडित करके इसके वैभव को लूट कर भारत की सनातनी आत्मा को सदैव के लिए समाप्त कर सकते हैं, लेकिन इसके बावजूद भारत की सनातनी परंपरा और सांस्कृतिक चेतना आज भी पूरी शक्ति के साथ जीवित है।
मुख्यमंत्री सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के त्रयंबकेश्वर बहुउद्देशीय हाल में आयोजित सोमनाथ संकल्प महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, अटूट आस्था की गौरव गाथा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मंदिर पर हुए विदेशी आक्रांताओं के हमले का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ सोमनाथ महादेव मंदिर पर ही नही भारत के हजारों धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों के साथ काशी विश्वनाथ धाम पर भी हमला हुआ। इसके बावजूद भारत की सनातनी परंपरा और सांस्कृतिक चेतना आज भी पूरी शक्ति के साथ जीवित है। जिन्होंने सनातन को मिटाने का प्रयास किया, आज वे खुद मिट्टी में मिल चुके हैं।
मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं को अब कोई नाम लेने वाला नहीं
मुख्यमंत्री ने महोत्सव में कहा कि मुहम्मद गौरी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं का अब कोई नाम लेने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि औरंगजेब ने बाबा विश्वनाथ के प्राचीन मंदिर को ध्वस्त कर गुलामी का ढांचा यहां खड़ा किया, लेकिन वे भारत की आत्मा को नहीं तोड़ पाया। आक्रांता समझ ही नहीं पाए कि सनातन केवल मंदिरों की दीवारों में नहीं, बल्कि भारत की चेतना में बसता है। भारत की चेतना आत्मा को अजर और अमर मानकर चलती है। यही भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सोमनाथ मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम दोनों ही भारत के इतिहास और सनातन संस्कृति की अदम्य शक्ति के प्रतीक हैं। सनातन संस्कृति पर आक्रमण तो हो सकते हैं, लेकिन उसे कभी पराजित नहीं किया जा सकता। विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है।
दुर्भाग्य से आज भी ऐसी कई शक्तियां है मौूजद
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से आज भी ऐसी कई शक्तियां हैं, जो भारत के गौरव के प्रतीक इन आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को आगे बढ़ते हुए देखना नहीं चाहतीं। इन्हींं लोगों ने सोमनाथ महादेव मंदिर के पुनर्प्रतिष्ठा कार्यक्रम में बाधा डाली थी। अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण में भी इन लोगों ने बार-बार बाधा खड़ी करने का प्रयास किया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश को नई दिशा मिल रही
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मजबूत नेतृत्व में देश को नई दिशा मिल रही है। इसका नतीजा यह है कि आज हम उन परंपराओं और मूल्यों को फिर से सम्मान दिला पा रहे हैं, जिन्हें करीब एक हजार साल पहले विदेशी आक्रांताओं ने नष्ट करने की कोशिश की थी। सोमनाथ महादेव के पुनर्प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे होने के मौके पर काशी विश्वनाथ में इसका उदाहरण देखने को मिल रहा है।
महोत्सव में स्कूली छात्राओं ने किया शंखनाद,सोमनाथ संकल्प का सामूहिक पाठ
महोत्सव में स्कूल की छात्राओं ने शंखनाद और मंत्रोच्चार के बीच राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री का स्वागत किया। समारोह में अतिथियों ने सोमनाथ महादेव को प्रणाम और पुष्पांजलि अर्पित की । इस अवसर पर जन समूह द्वारा ॐ जप किया गया। इसके बाद सोमनाथ संकल्प का सामूहिक पाठ किया गया। मुख्यमंत्री ने भी संकल्प का वाचन किया। इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं व अतिथियों ने भी उसका सामूहिक अनुच्चारण किया। महोत्सव में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पटका और रुद्राक्ष की माला पहनाई। इसके बाद वाराणसी के महापौर अशोक तिवारी ने मुख्यमंत्री को पटका और रुद्राक्ष की माला पहनाई। सोमनाथ मंदिर के 75वर्ष पूरे होने पर श्री काशी-विश्वनाथ मंदिर परिसर के मल्टीपरपज हॉल में आयोजित प्रदर्शनी का भी राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने अवलोकन किया। समारोह में कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, राज्यमंत्री हंसराज विश्वकर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य, कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी

