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(राउंडअप) युवा सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाए : सुनील आंबेकर

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(राउंडअप) युवा सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाए : सुनील आंबेकर


(राउंडअप) युवा सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाए : सुनील आंबेकर


- बीएचयू में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ- देश-विदेश के 1,300 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद जुटे- अनुसंधान एवं नवाचार का उद्देश्य मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति तथा राष्ट्रीय विकास होना चाहिएः योगी

वाराणसी, 13 जून (हि.स.)। भारत के सबसे बड़े विज्ञान मंथन–विज्ञान भारती (विभा) के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ शनिवार को काशी में हुआ। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के स्वतंत्रता भवन में आयोजित इस दो दिवसीय अधिवेशन में देश-विदेश के 1,300 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

बीएचयू के वैदिक विज्ञान केन्द्र, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-बीएचयू) तथा अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अधिवेशन का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार का उद्देश्य मानव कल्याण, आर्थिक प्रगति तथा राष्ट्रीय विकास होना चाहिए। भारत की समृद्ध वैज्ञानिक एवं ज्ञान परम्परा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार हमेशा से भारतीय सभ्यता में समाहित रहा है और इसने भारत की समृद्धि तथा वैश्विक नेतृत्व में योगदान दिया है।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार के बिना कोई भी राष्ट्र प्रगति नहीं कर सकता। इस संदर्भ में उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया कि वे अपनी वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता को राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित करें। आधुनिक विज्ञान को पारंपरिक ज्ञान से जोड़ने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने सतत विकास, प्राकृतिक कृषि, जमीनी स्तर के नवाचार तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

अधिवेशन में बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की स्थापना-दृष्टि विज्ञान भारती के उस उद्देश्य से गहराई से जुड़ी है, जिसके अंतर्गत आधुनिक विज्ञान और भारत की ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख एवं विज्ञान भारती के पालक सुनील आंबेकर ने आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति और भारत की समग्र ज्ञान परम्पराओं के बीच समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि समकालीन विज्ञान ने तकनीकी उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, किन्तु पर्यावरण, स्वास्थ्य तथा समाज से जुड़ी उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए अधिक समन्वित एवं मानव-केंद्रित दृष्टिकोंण आवश्यक है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों के तीव्र विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियों को मानव कल्याण एवं पर्यावरणीय स्थिरता के हित में उपयोगी बनाना विज्ञान भारती जैसे संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से सामाजिक आवश्यकताओं पर आधारित अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करने तथा भारतीय भाषाओं एवं भारत की समृद्ध ज्ञान परम्पराओं के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार का सुझाव दिया।

उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के अध्यक्ष डॉ. शेखर सी. मांडे ने कहा कि विज्ञान भारती भारत की ज्ञान परम्पराओं पर आधारित समग्र दृष्टिकोंण के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारतीय परम्परा में विज्ञान, दर्शन और अध्यात्म को परस्पर पूरक माना गया है। जलवायु परिवर्तन तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी वैश्विक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, नैतिकता और सभ्यतागत दृष्टिकोण के समन्वय से ही सार्थक समाधान प्राप्त किए जा सकते हैं।

विज्ञान भारती के महासचिव विवेकानन्द पई ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत की वैज्ञानिक विरासत को समकालीन वैज्ञानिक प्रगति से जोड़ने के लिए संगठन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने विज्ञान भारती के प्रमुख विषयों- प्राचीन से आधुनिक विज्ञान, विज्ञान एवं अध्यात्म तथा भारतीय भाषाओं में विज्ञान का उल्लेख करते हुए पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के समन्वय की आवश्यकता पर चर्चा की।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान - बीएचयू के निदेशक प्रो. अमित पात्रा ने क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय विकास में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार तथा संस्थागत सहयोग की भूमिका पर चर्चा की। अंतर विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र के निदेशक प्रो. प्रेम नारायण सिंह ने वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति को पर्यावरणीय स्थिरता तथा मानवीय मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर चर्चा की। अधिवेशन की थीम कृत्रिम बुद्धिमत्ता, विज्ञान और मानवता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विज्ञान का उद्देश्य केवल मशीनों को अधिक सक्षम बनाना नहीं, बल्कि मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में तीव्र प्रगति मानव जीवन को अभूतपूर्व रूप से प्रभावित कर रही है, किन्तु समाज का भविष्य तकनीकी उन्नति और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर निर्भर करेगा।

सत्र का संचालन प्रो. अरविन्द रानाडे ने किया। सत्र के अंत में प्रो. राजेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उद्घाटन सत्र के दौरान अधिवेशन स्मारिका तथा विज्ञान भारती के वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन भी किया गया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी विज्ञान मंथन पहल के अंतर्गत भारत की प्रख्यात महिला वैज्ञानिकों प्रो. रोहिणी गोडबोले, प्रो. अन्ना मणि तथा प्रो. असीमा चटर्जी पर आधारित प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी