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वैज्ञानिक संस्थान अब सामाजिक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे : डॉ. जितेंद्र सिंह

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वैज्ञानिक संस्थान अब सामाजिक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे : डॉ. जितेंद्र सिंह


वैज्ञानिक संस्थान अब सामाजिक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे : डॉ. जितेंद्र सिंह


वैज्ञानिक संस्थान अब सामाजिक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे : डॉ. जितेंद्र सिंह


वैज्ञानिक संस्थान अब सामाजिक जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे : डॉ. जितेंद्र सिंह


सीएसआईआर-एनबीआरआई के इको-एजुकेशनल हब (प्रकृति ज्ञान धाम) को राष्ट्र को समर्पित किया

लखनऊ, 08 अगस्त (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के वैज्ञानिक संस्थान अब केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं बल्कि समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक संस्थानों को उभरती पर्यावरणीय एवं जलवायु संबंधी चुनौतियों का समाधान करने के लिए पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक प्रौद्योगिकी का समन्वय करना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को यहां इको-एजुकेशनल हब का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा भारत की समृद्ध वनस्पति विरासत को बढ़ावा देने के लिए सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई), लखनऊ ने बन्थरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर (एमपीबीसी) में विकसित प्रकृति ज्ञानधाम राष्ट्र को समर्पित किया। यह एकीकृत परिसर देश का अपनी तरह का पहला इको-एजुकेशनल हब है, जिसे वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, संस्कृति और जन-जागरूकता को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह इको-एजुकेशनल हब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस परिकल्पना को साकार करता है, जिसमें विज्ञान, सतत विकास और जनभागीदारी को एकीकृत करते हुए देश की वानस्पतिक धरोहर को भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा रहा है। यह केंद्र विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा अनुभवात्मक अधिगम का एक अनूठा मंच सिद्ध होगा। उन्होंने किसानों, उद्योगों तथा आम जनता के हित में वैज्ञानिक अनुसंधान को उपयोगी प्रौद्योगिकियों और उत्पादों में परिवर्तित करने के लिए सीएसआईआर-एनबीआरआई के प्रयासों की सराहना की।

इससे पूर्व स्वागत भाषण देते हुए सीएसआईआर-एनबीआरआई तथा सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू के निदेशक डॉ. ज़बीर अहमद ने मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्थान द्वारा पादप विज्ञान अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण और प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों पर प्रकाश डाला।

डॉ. ज़बीर अहमद ने कहा कि इको-एजुकेशनल हब की परिकल्पना भारत की समृद्ध वनस्पति विविधता के एक जीवंत भंडार के रूप में की गई है, जहाँ आगंतुक इंटरैक्टिव एवं अनुभवात्मक माध्यमों से देश की वनस्पति विरासत को निकट से जान सकेंगे। नवविकसित प्रकृति ज्ञानधाम में भारतीय विरासत उद्यान, ‘पावन पथ’, भारत के संकटग्रस्त एवं राज्यीय पौधों को समर्पित उद्यान, दुर्लभ पौधों के संग्रह, नवग्रह वाटिका, नक्षत्र वाटिका तथा एक समर्पित बाँस उद्यान शामिल हैं, जिसमें बाँस की 43 प्रजातियाँ संरक्षित की गई हैं।

संस्थान ने अपने क्यूआर-कोड आधारित सूचना एवं व्याख्या तंत्र का भी प्रदर्शन किया, जिसके माध्यम से आगंतुक डिजिटल माध्यमों से पौधों से संबंधित वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सतत पर्यटन एवं पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रकृति पथ, पर्यावरण-अनुकूल विद्युत वाहन परिवहन तथा प्रस्तावित मियावाकी शहरी वन को भी इस परिसर में शामिल किया गया है।

इस अवसर पर मंत्री ने भारत के विरासत उद्यानों को प्रदर्शित करने वाली एक फिल्म टीज़र भी जारी किया। इस फिल्म में देश की उल्लेखनीय वनस्पति संपदा तथा पादप विविधता के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारिस्थितिक महत्व को दर्शाया गया है।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह, केंद्रीय विश्वविद्यालय ओडिशा के कुलपति डॉ. अजीत कुमार शासनी, वरिष्ठ वैज्ञानिक, शोधकर्ता, सीएसआईआर पुष्पकृषि मिशन के लाभार्थी किसान उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / मोहित वर्मा