अविभाजित मप्र के दौरान हुए करोड़ों के आवास ऋण घोटाले में दो आरोपित 25 मार्च तक न्यायिक रिमांड पर
रायपुर, 22 मार्च (हि.स.)। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और एसीबी ने 26 साल पुराने गृह निर्माण ऋण गबन प्रकरण में 'आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर' के तत्कालीन अध्यक्ष थावर दास माधवानी और 'सहकारी आवास संघ मर्यादित रायपुर के तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई 18 मार्च 2026 को हुई है। गिरफ्तार आरोपिताें को 25 मार्च 2026 तक पुलिस रिमाण्ड पर लिया गया है।
आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार जांच में पाया गया कि वर्ष 1995 से 1998 के दौरान आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर के तत्कालीन अध्यक्ष आरोपित थावरदास माधवानी ने अपनी समिति के 186 सदस्यों के नाम पर 1-1 लाख रुपये, कुल 1 करोड़ 86 लाख रुपये का गृह निर्माण ऋण मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ मर्यादित, क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर से प्राप्त किया गया।
ऋण अभिलेखों में गृह निर्माण स्थल ग्राम रायपुरा एवं पंडरीकांचा दर्शाया गया था। शिकायत प्राप्त होने पर उक्त प्रकरण का सत्यापन कराया गया, किन्तु सत्यापन में भी गलत प्रतिवेदन प्रस्तुत कर निर्माण कार्य पूर्ण होना बताया गया। बाद में कराये गये भौतिक सत्यापन में उक्त स्थलों पर न तो कोई मकान निर्मित पाया गया और न ही ऋण प्राप्त करने वाले व्यक्ति वहां उपलब्ध मिले।
जांच में कूटरचित दस्तावेजों, फर्जी प्रमाण पत्रों तथा आपराधिक षड्यंत्र के माध्यम से ऋण राशि के गबन किये जाने के तथ्य सामने आये। प्रकरण के अन्य दो नामजद आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है। प्रकरण में धारा 120बी, 406, 409, 420, 467, 468, 471 भादवि तथा धारा 13 (1) (सी), 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत अपराध दर्ज है। गिरफ्तार आरोपिताें को 25 मार्च 2026 तक पुलिस रिमाण्ड पर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपितों को पूर्व में कई बार नोटिस तामील करने का प्रयास किया गया, किन्तु वे अपने पते पर नहीं मिले तथा छिपकर रह रहे थे।
ब्यूरो ने पुराने लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता से पुनः परीक्षण में लेकर उनमें आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अविभाजित मध्य प्रदेश के दौरान हुए एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जिसने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया है।
जांच से यह भी स्पष्ट हुआ कि मध्यप्रदेश सहकारी आवास संघ के क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर के तत्कालीन क्षेत्रीय अधिकारी स्व. ए.ई. ग्रेबियल द्वारा बिना समुचित जांच के ऋण आवेदन स्वीकृत कर आवास संघ मुख्यालय को अग्रेषित किये गये, जिसके आधार पर ऋण स्वीकृत कराया गया। उनके द्वारा ऋणों के उपयोगिता प्रमाण पत्र तथा निर्माण के विभिन्न चरणों के पूर्णता प्रमाण पत्र भी जारी किये गये।
आरोपित बसंत कुमार साहू, तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक, द्वारा भी भवन निर्मित होने का प्रमाण पत्र जारी किया गया। आरोपितों द्वारा आपराधिक षड्यंत्र कर कूटरचित अभिलेखों का उपयोग करते हुए आवास संघ से गृह निर्माण हेतु धोखाधड़ीपूर्वक ऋण स्वीकृत कराया गया तथा राशि 01 करोड़ 86 लाख रुपये का बंदरबांट कर आपस में वितरित कर लिया गया। प्रकरण के अन्य दो नामजद आरोपित अब दिवंगत हो चुके हैं। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो अब लंबित पुराने मामलों की भी जांच कार्रवाई तेज कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / गायत्री प्रसाद धीवर

