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सनातन को बदनाम करने के षड्यंत्रों का प्रमाणों के साथ होगा पर्दाफाश: रामदेव

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सनातन को बदनाम करने के षड्यंत्रों का प्रमाणों के साथ होगा पर्दाफाश: रामदेव


हरिद्वार, 28 अक्टूबर (हि.स.)। हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय में 29 से 31 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन में सनातन धर्म और भारतीय ज्ञान परंपरा को बदनाम करने के षड्यंत्रों का तथ्यों और प्रमाणों के साथ पर्दाफाश किया जाएगा। योग गुरु स्वामी रामदेव ने बुधवार को कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सम्मेलन की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वान, शिक्षाविद और शोधकर्ता शामिल होंगे।

स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म और वैदिक परंपराओं पर सवाल उठाने वालों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वेदों में भेदभाव नहीं, बल्कि समस्त मानवता के कल्याण का संदेश निहित है। सनातन को संकीर्ण दृष्टि से देखने वालों को अपनी सोच का विस्तार करना चाहिए। सनातन केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को देखने, प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने और संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग है। भारत की पहचान उसकी ऋषि परंपरा, वेदों, उपनिषदों और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। इस विरासत पर गर्व करना प्रत्येक भारतीय का स्वाभाविक अधिकार है। अपनी परंपराओं को जाने बिना उन पर सवाल उठाना और हीनभावना रखना उचित नहीं है। सनातन की मूल भावना समन्वय, सह-अस्तित्व, करुणा और विश्व कल्याण की है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को किसी पूर्वाग्रह के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। वेदों का संदेश किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देता है। सनातन परंपरा ने सदियों से विचारों के आदान-प्रदान, आध्यात्मिक चिंतन और ज्ञान की विभिन्न धाराओं को स्थान दिया है। भारत की सांस्कृतिक विरासत अतीत की धरोहर के साथ वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। योग, आयुर्वेद, अध्यात्म और वैदिक ज्ञान की प्रासंगिकता आज पूरी दुनिया महसूस कर रही है।

स्वामी रामदेव ने आरोप लगाया कि कुछ लोग धर्मशास्त्रों और पुराणों के संदर्भों में बदलाव कर ऐसी बातें प्रस्तुत करते हैं, जिससे सनातन धर्म और आराध्य देवी-देवताओं की छवि प्रभावित होती है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम और माता सीता को मांसाहार एवं मदिरापान से जोड़कर प्रस्तुत करना, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को गलत संदर्भ में अपभ्रंश बताना और महायोगी शिव को नशे से जोड़कर दिखाना इसी षड्यंत्र का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक विषयों पर धारणा बनाने से पहले मूल संदर्भों और प्रमाणों को समझना जरूरी है। सनातन के विषय में अनर्गल आरोप लगाने वालों को तथ्यों के आधार पर बात रखनी चाहिए। सम्मेलन के दौरान वेद, उपनिषद, योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य पर विद्वान शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। पुस्तक प्रदर्शनी, शास्त्रार्थ और सांस्कृतिक गतिविधियां भी होंगी। भ्रामक बातें फैलाने वालों के मामलों में कानूनी पहलुओं पर विचार करने के लिए कमेटी गठित करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।

सनातन बोर्ड के गठन पर उन्होंने कहा कि अखाड़ा परिषद और संत समिति जैसे बड़े संगठन पहले से मौजूद हैं, नए बोर्ड का स्वरूप स्वायत्त होगा या अलग, इस पर स्थिति स्पष्ट होनी बाकी है।

देश में तख्तापलट की आशंकाओं पर स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत में बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल या मिडिल ईस्ट के देशों की तरह तख्तापलट नहीं होने वाला है। हमारे पास लाखों की संख्या में सैनिक, अर्धसैनिक बल, पुलिस फोर्स, न्यायालय और मजबूत लोकतंत्र है। जिसको सत्ता चाहिए वह लोकतांत्रिक तरीके से आसीन हो सकता है, सड़कों से रिजीम चेंज नहीं हो सकता। उन्होंने नेताओं से अपील की कि मेरा दल और मेरा नेता की सोच से ऊपर उठकर राजधर्म और राष्ट्रधर्म को प्राथमिकता दें।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला