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उत्तराखंड ने  98.7 प्रतिशत की साक्षरता दर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, पूर्ण साक्षरता का दर्जा किया हासिल

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उत्तराखंड ने  98.7 प्रतिशत की साक्षरता दर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया, पूर्ण साक्षरता का दर्जा किया हासिल


देहरादून, 08 जुलाई (हि.स.)। उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के छठे पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा प्राप्त कर लिया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद, केंद्र के 'उल्लास' कार्यक्रम के तहत राज्य ने 98.7 प्रतिशत की साक्षरता दर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है।

भारत सरकार के स्कूल शिक्षा साक्षरता विभाग के बाद निर्धारित मानकों को पूरा करने के बाद राज्यपाल ने आज राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने की स्वीकृति प्रदान की।

इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम पूर्ण साक्षर राज्य घोषित हो चुके हैं। अब उत्तराखंड भी इस सूची में शामिल हो गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लिए मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी का परिणाम है। कहा कि सरकार डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, सतत शिक्षा और जीवनोपयोगी कौशल प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनना प्रत्येक उत्तराखंडवासी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं आजीवन शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है।

विद्यालयी शिक्षा विभाग के सचिव रविनाथ रमन ने कहा कि पूर्ण साक्षरता सामाजिक और आर्थिक विकास की आधारशिला है। उन्होंने बताया कि उल्लास कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप राज्य यह लक्ष्य हासिल कर सका।

महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा आकांक्षा कोंडे और प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत ने भी इसे सभी जिलों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और समुदाय के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।

सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार उल्लास कार्यक्रम का उद्देश्य केवल निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाना ही नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवनोपयोगी कौशल और सतत अधिगम से जोड़ना भी है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल