पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू करने की तैयारी तेज, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी मसौदा समिति की अगुवाई
कोलकाता, 29 जून (हि. स.)। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए इसके मसौदे को तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति के गठन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई करेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति द्वारा तैयार किए जाने वाले यूसीसी विधेयक का मसौदा दो जुलाई को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने के बाद इसे विधानसभा में पेश किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होने वाला एक साझा कानूनी ढांचा तैयार करना है।
विधानसभा में घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में इस मुद्दे पर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्पष्ट किया कि संविधान द्वारा संरक्षित जनजातीय समुदायों को प्रस्तावित यूसीसी के दायरे से बाहर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता भाजपा की लंबे समय से घोषित नीति और चुनावी संकल्प का हिस्सा रही है।
समिक भट्टाचार्य ने उन आरोपों को भी खारिज किया कि प्रस्तावित कानून का संबंध परिवार के आकार को नियंत्रित करने से है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई व्यवस्था न तो यूसीसी का उद्देश्य है और न ही इसका हिस्सा।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा कानूनी सुधार के बजाय इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया है कि वे विधानसभा के भीतर और बाहर इस विधेयक का जोरदार विरोध करें।
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि प्रस्तावित यूसीसी केवल कानूनी सुधार का विषय नहीं है, बल्कि यह संविधान की मूल भावना, सामाजिक सहमति और भारत की बहुलतावादी व्यवस्था से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि असली सवाल यह है कि क्या यूसीसी वास्तव में नागरिकों के हित और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए लाई जा रही है या फिर इसका इस्तेमाल राजनीतिक ध्रुवीकरण के साधन के रूप में किया जा रहा है।
राज्य सरकार की घोषणा के साथ ही पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है। यदि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलती है, तो यह विधेयक जल्द ही विधानसभा में चर्चा और पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर

