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(अपडेट) शक्ति के साथ भक्ति की भी आवश्यकताः संघ प्रमुख डॉ. भागवत

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(अपडेट) शक्ति के साथ भक्ति की भी आवश्यकताः संघ प्रमुख डॉ. भागवत


(अपडेट) शक्ति के साथ भक्ति की भी आवश्यकताः संघ प्रमुख डॉ. भागवत


- त्रिपुरा में मां चिन्मयी सौंदर्य मंदिर का डॉ. मोहन भागवत ने किया उद्घाटन

अगरतला (त्रिपुरा), 21 अप्रैल (हि.स.)। त्रिपुरा के पश्चिम त्रिपुरा जिले के मोहनपुर महकमा अंतर्गत फकीरमुरा गांव में आदि शंकराचार्य के शुभ दिन पर मंगलवार को मां त्रिपुरेश्वरी को समर्पित मां चिन्मयी सौंदर्य मंदिर का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने किया। इस अवसर पर डॉ. भागवत ने चिन्मया हरिहर विद्यालय में पूर्णतः मुफ्त शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य को अत्यंत सराहा।

कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में अपने संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने गरिया पूजा के शुभ दिन उपस्थित दर्शकों का धन्यवाद करते हुए कहा, ज्ञान का अर्थ भाषण नहीं है, ज्ञान समझ है। उन्होंने कहा कि दो हजार वर्ष से पूरे विश्व ने विज्ञान से समाजवाद तक कई दर्शनाओं के परीक्षण और अनुभव से गुजरते हुए आया है, लेकिन वर्तमान समय में पृथ्वी ने यह महसूस किया है कि आज पृथ्वी को जीवन के प्रति भारत के दृष्टिकोण की आवश्यकता है, इसलिए आज विश्व को भारत की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म ने सम्पूर्ण संसार को सही दिशा दिखाई है। मंदिर भारतीय सामाजिक जीवन के केन्द्रबिंदु हैं। आज शक्ति के समानांतर भक्ति की भी आवश्यकता है। इसके अलावा, समाज उन लोगों को याद करता है जिनमें सभी के साथ मिलकर सभी की सेवा करने का भाव होता है। यही है भारत की संस्कृति। सरसंघचालक ने टिप्पणी की कि दक्षिण के चार राज्यों में सबसे अधिक सेवा कार्य किए जा रहे हैं और कहा कि हमारे बीच लंबे समय से विविधता रही है। तब से हम एक हैं। विविधता में एकता हमारी शक्ति है, लेकिन भारत के इस उत्थान को रोकने के लिए बाहरी शक्तियां हमारे बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास कर रही हैं।

ऐसे माहौल में उन्होंने सभी को सतर्क रहने के लिए आमंत्रित किया। संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में दोहराया कि आज के समय में केवल सत्य का समर्थक होना पर्याप्त नहीं है; उस सत्य की स्थापना के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है। भारत की शक्ति इसकी संस्कृति में निहित है। निश्चित रूप से भारत ने कभी आक्रामक मानसिकता को अपनाया नहीं है। भारत लगातार शांति और भाईचारे को बढ़ावा देता रहा है- आज की युद्ध-पीड़ित दुनिया में जिसके लिए शांति अत्यंत आवश्यक है। ठीक इसी क्षेत्र में भारत काम कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत के ऋषि और दृष्टा लोगों ने भारत में अपनाई गई दैवीय पूजा के प्रति जो अद्वितीय दृष्टिकोण अपनाया, देश की सामाजिक संरचना के प्रत्येक कोने में सेवा करने का कार्य हाथ में लिया- जिसकी विशेषता है नदियों, पहाड़ों, पर्वतों सहित प्रकृति के प्रति गहरी श्रद्धा और यह कीर्तिमान स्वरूप प्रयास एक दिन में पूरा नहीं हुआ। डॉ. मोहन भागवत ने उस उन्नत अभियान को एक निरंतर प्रक्रिया मानते हुए उल्लेख किया।

समारोह में त्रिपुरा और महाराष्ट्र के राज्यपाल इंद्रसेन रेड्डी नल्लू और जिष्णु देबबर्मा एवं मुख्यमंत्री माणिक साहा भी मौजूद रहे।

उल्लेखनीय है कि मां चिन्मयी सौंदर्य मंदिर मां त्रिपुर सुंदरी को समर्पित है। यह एक अनोखा आर्किटेक्चरल और आध्यात्मिक स्मारक है। मंदिर में तमिलनाडु से लाए गए 27 काले पत्थर के खंभे हैं। ये खंभे हिंदू ज्योतिष के 27 सितारों के प्रतीक हैं। मंदिर को भगवान से जुड़ाव के प्रतीक के तौर पर बिना किसी पारंपरिक छत के बनाया गया है। इसके बीच में मां त्रिपुर सुंदरी की 15 फुट ऊंची काले पत्थर की मूर्ति के साथ रोजाना पूजा के लिए माताबारी मंदिर के स्टाइल में बनी एक छोटी मूर्ति है।

मंदिर परिसर में देवी सौंदर्य लहरी और दूसरे भक्ति ग्रंथों की नक्काशी और लिखावट भी है। इससे मंदिर का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। नेपाल से चुने गए कुछ पुजारी मां चिन्मयी सौंदर्य मंदिर- प्राणप्रतिष्ठा और कुंभ-अभिषेक समारोह को संपन्न कराया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय