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छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा, ग्रामीणों ने मनाया आजादी का जश्न

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छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त गांवों में पहली बार लहराया तिरंगा, ग्रामीणों ने मनाया आजादी का जश्न


दंतेवाड़ा, 15 अगस्त (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के उन गांवों में जहां कभी नक्सलियों का खौफ था, इस बार 80वां स्वतंत्रता दिवस का जश्न कुछ अलग रहा। नक्सल मुक्त हुए पुरंगेल, लोहागांव, बड़ेपल्ली, बेंगपाल और गुमलनार पंचायत के गिरसापारा में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया गया। खुले और निर्भय माहौल में राष्ट्रध्वज लहराते देख ग्रामीणों में उत्साह और गर्व नजर आया।

पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के निर्देशन में दंतेवाड़ा पुलिस और जिला प्रशासन ने इन पांचों गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम में पुलिस जवानों और अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, महिलाएं, युवा और बच्चे भी शामिल हुए। तिरंगा फहराने के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया। समारोह में बच्चों ने देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। गांव में देशभक्ति के गीत गूंजे और ग्रामीणों ने उत्साह के साथ आजादी का पर्व मनाया। पुलिस की ओर से ग्रामीणों को मिठाई बांटी गई, जबकि बच्चों को खेल सामग्री दी गई। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं और जरूरतें जानीं। ग्रामीणों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए भी प्रेरित किया गया।

इन गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का आयोजन सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। पुलिस और प्रशासन ने इसे नक्सल प्रभाव से बाहर निकल रहे इलाकों में शांति और विश्वास की नई तस्वीर के तौर पर पेश किया। जहां कभी ग्रामीणों के बीच भय का माहौल था, वहीं अब बच्चों की मौजूदगी में तिरंगा लहराया गया और पूरा गांव आजादी के जश्न में शामिल हुआ। दंतेवाड़ा पुलिस का कहना है कि सुरक्षा, विश्वास और विकास के माध्यम से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना और ग्रामीणों को निर्भय माहौल उपलब्ध कराना उसका संकल्प है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे