तमिलनाडु विधानसभा चुनाव: तमिलगा वाझ्वुरिमै काची ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम गठबंधन से तोड़ा नाता
चेन्नई, 22 मार्च (हि.स.)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच तमिलगा वाझ्वुरिमै काची (टीवीके) ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) से अलग होने का ऐलान कर दिया है। इसकी घोषणा पार्टी प्रमुख वेलमुरुगन ने रविवार को चेन्नई में प्रेस वार्ता के दौरान की।
वेलमुरुगन ने बताया कि उनकी पार्टी 2019 के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक द्रमुक गठबंधन का हिस्सा रही है और कई चुनावों में साथ मिलकर काम किया। इस बार भी द्रमुक के साथ सीट बंटवारे को लेकर बातचीत हुई, लेकिन पार्टी को केवल एक सीट देने का प्रस्ताव दिया गया, जबकि उन्होंने दो सीटों की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने पहले चरण की बातचीत में ही अधिक सीटों की मांग रखी थी और हाल ही में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भी स्पष्ट कर दिया गया था कि यदि अतिरिक्त सीटें नहीं मिलीं तो गठबंधन छोड़ दिया जाएगा। इसके बावजूद द्रमुक की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
वेलमुरुगन ने आरोप लगाया, “हमारी 10 प्रमुख मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। हमने विधानसभा के अंदर और बाहर कई मुद्दों पर संघर्ष किया, लेकिन हमारी बातों को महत्व नहीं दिया गया।”
उन्होंने आगे कहा कि अधिकारियों के प्रभाव में द्रमुक ने उनकी पार्टी को गठबंधन से बाहर कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया, “तमिलनाडु में अब अधिकारियों का ही शासन चल रहा है”।
वेलमुरुगन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी अब द्रमुक गठबंधन का हिस्सा नहीं रहेगी और न ही अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (अन्नाद्रमुक)–भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गठबंधन में शामिल होगी।
द्रमुक की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय की बात करने वाली पार्टी जाति-आधारित जनगणना कराने से क्यों पीछे हट रही है। साथ ही वन्नियार समुदाय को 10.5 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा और पूछा कि आखिर किस दबाव में यह निर्णय लागू नहीं किया गया।
इसके अलावा, उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि तमिलनाडु जॉब्स ओनली एक्ट को लागू क्यों नहीं किया गया और तमिल शिक्षित युवाओं को नौकरियों में प्राथमिकता देने के लिए अब तक कानून क्यों नहीं बनाया गया।
वेलमुरुगन ने कहा कि उनकी पार्टी के लिए सीटों से ज्यादा उनकी 10 मांगें महत्वपूर्ण हैं और जो भी राजनीतिक दल इन मांगों को स्वीकार करेगा, उसके साथ बातचीत की जाएगी। सहयोगी संगठनों के साथ चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।
इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना बढ़ गई है और आगामी विधानसभा चुनाव का मुकाबला और अधिक रोचक होने की उम्मीद है।-----------------
हिन्दुस्थान समाचार / Dr. Vara Prasada Rao PV

