तृणमूल कांग्रेस में दो गुटों का विवाद, चुनाव आयोग ने नाम और चुनाव चिन्ह पर लगाई रोक
नई दिल्ली, 17 सितंबर (हि.स.)। चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) में नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद के बीच अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों के ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
आयोग ने दोनों गुटों को 18 सितंबर को सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और तीन-तीन वैकल्पिक चुनाव चिन्ह बताने का निर्देश दिया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी एवं सुखबीर सिंह संधू की पीठ ने आज यह आदेश दिया। आयोग के अनुसार, पार्टी में इस समय दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों खुद को असली एआईटीसी बता रहे हैं।
एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला है। उसका दावा है कि 20 जून को हुई नेशनल वर्किंग कमेटी (एनडब्ल्यूसी) की बैठक में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई थी। दूसरा गुट रितब्रत बनर्जी और अरूप रॉय का है। उसका कहना है कि एनडब्ल्यूसी का कार्यकाल पहले ही खत्म हो गया था। इसलिए इस गुट ने 22 जून को कोलकाता में विशेष सत्र बुलाकर अरूप रॉय को चेयरपर्सन चुना।
इस गुट ने ममता बनर्जी के गुट के खिलाफ अलीपुर सिविल कोर्ट से 7 जुलाई, 6 अगस्त और 16 सितंबर को निषेधाज्ञा भी हासिल की है।
चुनाव आयोग ने इस विवाद को लेकर 12 और 17 सितंबर को दोनों पक्षों की बात सुनी। इस बीच पांच विधानसभा और लोकसभा उपचुनावों में दोनों गुटों ने अलग-अलग फॉर्म-बी के जरिए अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें नंदीग्राम सीट भी शामिल है।
आयोग ने कहा कि चुनाव चिन्ह आदेश, 1968 के पैरा-15 के तहत अंतिम फैसला लेने में समय लगेगा। इसलिए फिलहाल अंतरिम व्यवस्था की गई है।
आयोग के आदेश के मुताबिक कोई भी गुट अकेले ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा। कोई भी गुट आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल नहीं करेगा। दोनों गुटों को मूल पार्टी के नाम से जुड़े अलग-अलग नाम चुनने होंगे। दोनों गुटों को चुनाव आयोग की मुक्त चुनाव चिन्हों की सूची में से अलग-अलग चिन्ह चुनने होंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

